मेघा रे मेघा रे,,,,,,,,,,,,,रूठे इंद्र ,सूखी नदियां व ताल तलैया, प्यासी धरती, कौन बुझाएगा धरती का प्यास,खिसक रहा चम्पाकल का जलस्तर,दम तोड़ रहा हरे वृक्ष,बेहाल हो रहे पशु पंक्षी व खतरे में पड़ा ननिहलो की जिंदगी
सासाराम/ रोहतास ( दुर्गेश किशोर तिवारी):-कहा जाता है कि जल ही जीवन है जल के बगैर कोई नही रह सकता।लेकिन...
