नोएडा के बाद अब मेरठ में नाले ने ली जान,

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मेरठ: नोएडा में हाल ही में इंजीनियर युवराज मेहता की खुले नाले में गिरने से हुई मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि मेरठ में भी वैसी ही एक दर्दनाक घटना सामने आई है. मेरठ के व्यस्ततम इलाके आबूलेन पर स्थित एक खुले नाले में ई-रिक्शा समेत गिरने से एक चालक की मौत हो गई. यह हादसा शहर के कैंट बोर्ड और नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.कैंट क्षेत्र में दास मोटर्स की लाइन में आबूनाले की दीवार टूट गई है। किनारे की मिट्टी धीरे-धीरे कट रही है। जिससे सड़क भी धंस रही है। सड़क का काफी किनारा कट गया है।

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बेगमपुल चौराहे से यह सड़क हनुमान चौक वाली सड़क को लिंक करती है।इससे कैंट बोर्ड कार्यालय वाली सड़क पर भी पहुंचते हैं। इसलिए वाहन इस पर बड़ी संख्या में चलते हैं। दो बार यहां कार नाले गिर चुकी है। इसके बाद भी कैंट बोर्ड ने नाले की दीवार नहीं बनवाई।घंटाघर जहां पर एसपी सिटी का कार्यालय है। ठीक सामने कई महीने से नाले का एक बड़ा चौड़ा हिस्सा सड़क किनारे खुला पड़ा है। आते-जाते वाहनों का इसमें फंसकर पलटने का खतरा बना हुआ है, लेकिन कुछ ही दूरी पर निगम कार्यालय में बैठने वाले नगर निगम अधिकारियों को यह खतरा नजर नहीं आ रहा है।

बात दिल्ली रोड पर मोहकमपुर बस्ती वाले मोड़ की करें तो सड़क किनारे नाले की मिट्टी लगातार कटने से काफी चौड़ा कटान हो गया है। तेज रफ्तार वाहन निकलते हैं। जरा सी चूक वाहन चालक पर भारी पड़ सकती है। लेकिन नगर निगम की नींद नहीं टूट रही है। हादसों को दावत देते इन स्थानों पर न तो संकेतक लगे हैं और न ही बेरीकेडिंग है।बिजली बंबा बाइपास रोड पर आए दिन वाहन रजवाहे में गिर रहे हैं। रजवाहे किनारे रेलिंग न होने से ये स्थिति बनी हुई है। लोक निर्माण विभाग की सड़क है। सड़क सुरक्षा के इंतजाम नदारद है। ट्रैफिक पुलिस के रजिस्टर इस रोड पर होने वाले हादसों से भरे पड़े हैं। स्ट्रीट लाइट भी नहीं जलती है। अंधेरा और कोहरा दोनों हादसे की वजह बन रहे हैं। इसके बाद भी जिला प्रशासन की आंखें नहीं खुल रही हैं।

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