Adityapur Nagar Nigam: “पानी और साफ-सफाई पर हाहाकार, झामुमो-भाजपा में तकरार, मेयर संजय सरदार ने जनहित के मुद्दों को किया दरकिनार, बोर्ड बैठक को लेकर हैं बेकरार

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आदित्यपुर: आदित्यपुर नगर निगम के मेयर संजय सरदार की अजीबो गरीब कार्यशैली पर अब चर्चा तेज होती जा रही है. मौजूदा स्थिति यह है कि पानी और साफ-सफाई जैसे जनहित के कार्यों को लेकर निगम क्षेत्र की जनता त्राहिमाम हैं. हालत यह है कि इन मुद्दों को लेकर झामुमो और भाजपा में तकरार की स्थिति उत्पन्न होती दिख रही है, जबकि ‘मेयर साहब’ आगामी 28 मई को प्रस्तावित बोर्ड बैठक की तैयारी में हैं. निगम से जुड़े सूत्रों की मानें तो यह बोर्ड बैठक सिर्फ इस मुद्दे को लेकर बुलाई जा रही है कि आदित्यपुर-2 स्थित जागृति भवन में नगर निगम का प्रशासनिक कार्यालय खुले या नहीं खुले, इस पर तमाम वार्ड पार्षदों को अपनी राय देनी है. जबकि, क्षेत्र की जनता पेयजल संकट, गंदगी, बंद स्ट्रीट लाइट और टूटी सड़कों जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है. ऐसे में अब निगम प्रशासन का सिर्फ प्रशासनिक भवन निर्माण के मुद्दे पर बैठक बुलाना जनता की असली समस्याओं से ध्यान भटकाना माना जा रहा है. इसे लेकर आम जनता के बीच तो मेयर संजय सरदार की अगुआयी वाली आदित्यपुर नगर निगम की कार्यशैली को लेकर फजीहत तो हो ही रही है. वहीं, हालिया निगम चुनाव में झामुमो समर्थित प्रत्याशी भुगलू सोरेन उर्फ डब्बा सोरेन के नेतृत्व में विपक्ष को निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाने का बड़ा मौका भी मिल गया है. इतना ही नहीं, इस मौके को झारखंड युवा मोर्चा (झायुमो) के जिला अध्यक्ष भुगलू सोरेन उर्फ डब्बा सोरेन जबरदस्त तरीके से भुनाने की पूरी तैयारी भी कर चुके हैं. उनके नेतृत्व में भाजपा के मेयर संयय सरदार एवं स्थानीय भाजपा विधायक न सिर्फ जनहित के मुद्दों के विपरित काम करने का आरोप लगाया गया है, बल्कि आगामी 22 मई, शुक्रवार को नगर निगम कार्यालय के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है. इस दौरान निगम क्षेत्र में पानी की समस्या, बिजली व्यवस्था, टूटी सड़कें, नाली एवं साफ-सफाई की बदहाल स्थिति, प्रतिदिन बढ़ती महंगाई और गरीब दुकानदारों के हटाने के मुद्दे को जोरशोर से उठाने की तैयारी है. यह अलग बात है कि भाजपा ने भुगलू सोरेन के बयानों की कड़ी निंदा की है और हेमंत सरकार पर नगर निगम क्षेत्र के विकास कार्यों को ठप्प करने का आरोप लगाया है. बावजूद इसके, मेयर के नेतृत्ववाली नगर निगम की टीम को लेकर सवाल तो खड़े हो ही रहे हैं, वह भी 28 मई को होनेवाली बोर्ड बैठक को लेकर. इस कार्यशैली के खिलाफ कई पार्षद भी गोलबंद होते बताए जा रहे हैं. उनका आरोप है कि नगर निगम क्षेत्र में स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. कई वार्डों में पानी की भारी किल्लत है, नियमित कचरा उठाव नहीं हो रहा, नालियां जाम हैं और रात होते ही कई इलाके अंधेरे में डूब जाते हैं क्योंकि स्ट्रीट लाइट महीनों से खराब पड़ी हैं. इन समस्याओं को लेकर आम जनता में भी भारी नाराजगी है, लेकिन निगम प्रशासन इन मुद्दों पर गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है. सवाल यह भी उठ रहे हैं निगम की बोर्ड बैठक में जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए थे, लेकिन आज तक उन प्रस्तावों की प्रतिलिपि किसी भी पार्षद को उपलब्ध नहीं कराई गई. इतना ही नहीं, आगामी बोर्ड बैठक के लिए भी किसी पार्षद से एजेंडा तक नहीं मांगा गया, जिससे पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि प्रशासनिक भवन का निर्माण कहां होगा, इसका अंतिम निर्णय नगर विकास विभाग और राज्य सरकार को लेना है. ऐसे में इस विषय को प्राथमिकता देकर बोर्ड बैठक बुलाना तब उचित नहीं माना जा सकता, जब शहर की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हो. इससे आदित्यपुर नगर निगम की अंदरूनी राजनीति भी गरमाने लगी है. यह मांग तेज होने लगी है कि 28 मई की बैठक में सबसे पहले पेयजल संकट, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट मरम्मत, सड़क-नाली निर्माण और पूर्व में पारित प्रस्तावों की जानकारी जैसे मुद्दों को शामिल किया जाए. साथ ही भविष्य में प्रत्येक बोर्ड बैठक से पहले सभी पार्षदों से एजेंडा आमंत्रित करने की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है. अब देखना यह होगा कि निगम प्रशासन जनहित के मुद्दों को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर 28 मई की बैठक केवल “भवन राजनीति” तक सीमित रह जाती है.

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