ईरान युद्ध ने बढ़ाई भारत के फल‑सब्ज़ी निर्यातकों की मुश्किलें, फ्रेट रेट और डिलीवरी में देरी से बढ़ी चिंता


नई दिल्ली : ईरान में जारी युद्ध के चलते भारत के फल और सब्ज़ी निर्यातक गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इस बीच व्यापार के माहौल पर बड़ा असर पड़ा है और व्यवसायियों की चिंता बढ़ गई है।निर्यातकों का कहना है कि समुद्री और हवाई फ्रेट चार्ज बढ़ने से माल भेजना महंगा हो गया है। इस वजह से कीमती फल‑सब्ज़ी की डिलीवरी में देरी हो रही है और कई बार खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है। प्रदर्शन के मुताबिक जहाज़ों और प्लेन की कमी से शिपमेंट समय पर नहीं पहुंच पा रही है।

व्यापारियों के अनुसार ईरान‑इजरायल‑अमेरिका संघर्ष के कारण मध्य पूर्व की एयरलाइंस और समुद्री मार्ग प्रभावित हैं। ऐसे में जहाज़ों को लंबा रूट लेना पड़ रहा है और समय भी दोगुना हो रहा है। फ्रेट लागत में इजाफा होने पर कई निर्यातक नए ऑर्डर लेने में भी हिचकिचा रहे हैं।मुंबई जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर सैकड़ों कंटेनर फंसे हुए हैं, जिनमें प्याज़, अंगूर, केला और अन्य हरी सब्ज़ियाँ शामिल हैं। ये माल दुबई और अन्य गल्फ देशों के लिए भेजा जाना था, लेकिन अब ये बंदरगाहों पर ही रूका हुआ है।
कई निर्यात कंपनियों ने कहा है कि एयर फ्रेट में 30 से 40 फीसदी का प्रीमियम चार्ज लिया जा रहा है। समुद्री जहाज़ों के लिए भी अतिरिक्त शुल्क लग रहे हैं, जिससे व्यापारियों के लिए लागत और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं।व्यापार संगठन सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं ताकि निर्यातक इस कठिन समय में नुकसान से बच सकें। उन्होंने कहा है कि अगर समस्या लंबी चलती है तो व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है और घरेलू बाजार की कीमतें भी प्रभावित होंगी।



