3P  (Police ,Politician, & PRESS ) का किंग हुआ ढेर!”  | करोड़ों की जायदाद के लिए भाई बना दुश्मन | देहरादून में दिनदहाड़े कॉन्ट्रैक्ट किलिंग | Vikram Sharma Murder Case की ये है कहानी…

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देहरादून / जमशेदपुर:– उत्तराखंड में देहरादून के राजपुर रोडपर हुई विक्रम शर्मा की हत्या अब सिर्फ गैंगवार नहीं रह गई. यह खून के रिश्तों की बेरहम कहानी बनकर सामने आई है. पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस हत्या की पटकथा खुद उसके छोटे भाई अरविंद शर्मा ने लिखी थी. शूटरों की पहचान हो चुकी है और करोड़ों की संपत्ति के लालच में झारखंड के जमशेदपुर में रची गई इस साजिश के सुराग मिल गए हैं.

शुक्रवार सुबह सिल्वर सिटी मॉल में जो हुआ, वह महीनों की प्लानिंग का नतीजा था. जमशेदपुर पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जुलाई 2025 में ही अरविंद शर्मा जमशेदपुर के मानगो इलाके पहुंचा था. यहां उसकी मुलाकात अपने पुराने साथी प्रभात से हुई. इसी मुलाकात में विक्रम को रास्ते से हटाने का पूरा खाका तैयार किया गया. सीसीटीवी फुटेज, लोकल इनपुट और संदिग्धों की गतिविधियों के आधार पर अब पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है.

खून से भारी पड़ गई संपत्ति
इस खूनी खेल की जड़ में है बिष्टुपुर और देहरादून में फैली करोड़ों की संपत्ति. कहानी 1998 से शुरू होती है जब जमशेदपुर में ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या हुई थी. इस मामले में विक्रम शर्मा, उसका भाई अरविंद और गैंगस्टर अखिलेश सिंह आरोपी थे. अशोक की मौत के बाद विक्रम ने शातिर चाल चली. उसने अशोक की विधवा पिंकी शर्मा की शादी अपने छोटे भाई अरविंद से करवा दी. मकसद एकदम साफ था: अशोक की करोड़ों की संपत्ति और कारोबार पर परिवार का कब्जा बनाए रखना.

कठपुतली बना अरविंद, रिमोट कंट्रोल विक्रम के हाथ
पिंकी से शादी के बाद अरविंद के नाम पर दौलत तो आ गई, लेकिन असली ताकत विक्रम के पास ही रही. जेल से बाहर आने के बाद विक्रम ने देहरादून और बिष्टुपुर की संपत्तियों पर अपना एकछत्र राज कायम कर लिया. देहरादून की जमीनों और स्टोन क्रशर के कारोबार में हिस्सेदारी को लेकर दोनों भाइयों में खटास बढ़ती गई. अरविंद को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा था. आखिरकार उसने तय किया कि इस विवाद का एक ही हल है- ‘भाई’ को रास्ते से हटा दो.

पेशेवर शूटरों को बुलाया गया
यह कोई जज्बाती हत्या नहीं थी. यह एक ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ थी, जो बेहद प्रोफेशनल तरीके से अंजाम दी गई. पुलिस को मिले सुराग बताते हैं कि हत्यारे फ्लाइट से झारखंड से उत्तराखंड पहुंचे थे ,हरिद्वार पुलिस की जांच में एक अहम सुराग हाथ लगा है. हत्यारों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद की गाड़ी नहीं ली. आकाश कुमार प्रसाद नाम के शूटर ने हरिद्वार रेलवे स्टेशन के सामने एक दुकान से दो वाहन किराए पर लिए. उसने झारखंड के पते वाला आधार कार्ड जमा कराया. गुरुवार को उन्होंने एक बाइक किराए पर ली. फिर वारदात वाली सुबह यानी शुक्रवार तड़के 4 बजे एक स्कूटी भी किराए पर उठाई. सुबह 4 बजे हरिद्वार से चले और 9 बजे तक देहरादून पहुंच गए.

घात लगाकर बैठे थे हत्यारे
शूटरों ने पहले सिल्वर सिटी मॉल और विक्रम की गतिविधियों की पूरी रेकी की थी. उन्हें सटीक जानकारी थी कि विक्रम कब जिम आता है और कब बाहर निकलता है. सुबह करीब 10:10 बजे विक्रम ‘एनी टाइम, एनी क्लब’ जिम में अपना वर्कआउट खत्म कर बाहर निकल रहे थे. वह अपनी लाइसेंसी पिस्टल साथ रखते थे, लेकिन इस्तेमाल का मौका ही नहीं मिला. दो शूटर पहले से ही मॉल की सीढ़ियों पर घात लगाए बैठे थे. जैसे ही विक्रम सीढ़ियों से नीचे उतरे, हमलावरों ने बेहद करीब से फायरिंग शुरू कर दी. तीन गोलियां लगीं, दो सीधे सिर में और मौके पर ही विक्रम की मौत हो गई. वारदात के बाद दोनों शूटर पैदल ही मॉल से बाहर भागे. कुछ दूरी पर उनका तीसरा साथी बाइक स्टार्ट किए खड़ा था. तीनों सवार होकर फरार हो गए.

पहचान में आए तीन खूंखार शूटर
सीसीटीवी फुटेज और सुरागों के आधार पर पुलिस ने तीनों हमलावरों की पहचान कर ली है. ये जमशेदपुर के बागबेड़ा और जुगसलाई इलाके के कुख्यात अपराधी हैं और गैंगस्टर गणेश सिंह गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं:

आकाश कुमार प्रसाद (21 वर्ष)
बागबेड़ा, जमशेदपुर का रहने वाला. होटल से उसका आधार कार्ड मिला है जिसमें जन्मतिथि 27/03/2004 दर्ज है. उस पर परसुडीह इलाके में एक शराब कारोबारी की हत्या का आरोप है. सीसीटीवी में साफ दिखाई दे रहा है.

आशुतोष कुमार सिंह (23 वर्ष)
बागबेड़ा निवासी. होटल से आधार कार्ड बरामद, जन्मतिथि 19/10/2003. रेलवे ठेकेदार नीरज दुबे पर फायरिंग मामले में नाम आया था. पिछले डेढ़ साल से अपराध की दुनिया में सक्रिय.

विशाल सिंह
जुगसलाई निवासी. तिकड़ी का सबसे खतरनाक चेहरा. दुमका में गैंगस्टर अमरनाथ सिंह की हत्या का आरोपी. इस मामले में जेल जा चुका है, फिलहाल जमानत पर बाहर था.

कौन था विक्रम शर्मा?
विक्रम महज अपराधी नहीं था- वह अपराध का ‘कॉर्पोरेट मैनेजर’ था. जमशेदपुर पुलिस की फाइलों में उसे गैंगस्टर अखिलेश सिंह का ‘ब्रेन’ कहा जाता था. उसने अपराध जगत में टिके रहने का एक फार्मूला बनाया था- ‘3P’: पुलिस, पॉलिटिशियन और प्रेस को मैनेज करना. 2004 से 2009 के बीच जमशेदपुर के कई थानेदार और डीएसपी स्तर के अधिकारी उसके सीधे संपर्क में थे. सूत्र तो यह भी बताते हैं कि वह अपने विरोधियों को पुलिस के जरिए ही इन्काउनर करवा देता या जेल भिजवाता था.

देहरादून में रईस की जिंदगी
जमशेदपुर में खून-खराबा फैलाने के बाद विक्रम 2017 से देहरादून में बस गया था. यहां वह अमन विहार की ‘ग्रीन व्यू रेजिडेंसी’ में एक रईस कारोबारी की तरह रहता था विक्रम के पास ऑडी और इनोवा जैसी गाड़ियां थीं. पड़ोसियों को भनक तक नहीं थी कि उनके बीच 30 से ज्यादा हत्याओं का आरोपी रह रहा है. वह खुद को ‘सफेदपोश’ नेता के रूप में पेश कर रहा था और हाल ही में जमशेदपुर की राजनीति में सक्रिय होने की फिराक में था.

गुरु-शिष्य का खूनी रिश्ता
विक्रम ने ही अखिलेश सिंह को ‘डॉन’ बनाया था. वह उसे चाइनीज मार्शल आर्ट्स की फिल्में दिखाता था ताकि अखिलेश ‘हार्डकोर’ बन सके. श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे और टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की हत्या इसी ‘गुरु-शिष्य’ की जोड़ी ने प्लान की थी.

पुलिस का एक्शन
उत्तराखंड एसटीएफ और पुलिस ने झारखंड पुलिस से संपर्क साधा है. एक टीम झारखंड पहुंची है और शूटरों के घरों में दबिश दे रही है. पुलिस उस फ्लाइट के रिकॉर्ड खंगाल रही है जिससे शूटर आए थे. हरिद्वार में जिस दुकान से बाइक किराए पर ली गई, उसके आसपास के सीसीटीवी फुटेज से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि क्या कोई स्थानीय व्यक्ति उनकी मदद कर रहा था. विक्रम की पत्नी सोनिया शर्मा के बयान और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर पुलिस अरविंद शर्मा की तलाश कर रही है. आशंका है कि वह नेपाल या किसी दूसरे राज्य में अंडरग्राउंड हो गया है.

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