जमशेदपुर के राजकीय महिला पॉलिटेक्निक में दो शिक्षकों पर छात्रा से छेड़छाड़ का गंभीर आरोप, 6 माह बीत जाने पर भी कार्रवाई नहीं


जमशेदपुर/रांची: – जमशेदपुर के ग़म्हरिया स्थित राजकीय महिला पॉलिटेक्निक में पदस्थापित दो शिक्षकों पर छात्रा के साथ छेड़छाड़, दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न का गंभीर सनसनीखेज का मामला सामने आया है। महिला पॉलिटेक्निक में पुरुष शिक्षकों द्वारा छात्रा के साथ छेड़छाड़ का यह मामला शिक्षक समुदाय के लिए शर्मशार करनेवाली बात है। बताया गया कि यह गंभीर मामला राज्य मुख्यालय तक पहुंचने के बाद इसकी लीपापोती ने महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। बताया गया कि छेड़छाड़ जैसे इस मामले की शिकायत झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (JUT) तक पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी शिक्षक श्री बदन डे और एच एस त्रिपाठी से 5 अप्रैल 2025 तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा था।
विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम विकास निदेशक की ओर से जारी पत्र (संख्या JUT-1283/2023/344) में कहा गया है कि छात्रा ने 26 दिसंबर 2024 को गंभीर आरोपों के साथ लिखित शिकायत दी थी। इस शिकायत के आधार पर आंतरिक शिकायत समिति ने मामले की जांच की और अपनी कार्यवाही की रिपोर्ट विश्वविद्यालय को दी। रिपोर्ट में शिकायत को संज्ञान योग्य और गंभीर माना गया है।
विश्वविद्यालय ने बताया कि उपलब्ध तथ्य आरोपी शिक्षक के विरुद्ध प्रथम दृष्टया कार्रवाई के लिए पर्याप्त हैं। इसी आधार पर विश्वविद्यालय ने आरोपी से स्पष्टीकरण मांगते हुए स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा तक जवाब नहीं प्राप्त होता है, तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एकतरफा निर्णय लिया जाएगा।
पत्र में यह भी कहा गया है कि निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के लिए आरोपी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जा रहा है।
मामले ने संस्थान में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यह शिक्षण संस्थान में छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। छात्राओं और अभिभावकों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है। बल्कि ऐसे प्रतिष्ठित तकनीकी शैक्षणिक संस्थान में अगर छात्राओं के साथ गलत हरकत करने की जुर्रत शिक्षक करे, और फिर उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो, तो भला कौन अभिभावक अपनी बच्ची को यहां नामांकन कराएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दोनों शिक्षक अपनी पैरवी और पहुंच के बल पर इस मामले को लीपापोती करने में जुट गए हैं।
अब सबकी निगाहें विश्वविद्यालय द्वारा की जाने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।




