लोक आलोक न्यूज के खबर का असर …5 दिन के भीतर ही बदल गया सिविल सर्जन का आदेश…कार्यालय के आदेश पर उठे सवाल, अमलगम कंपनी के 4 करोड़ के बिल पर विभागीय चुप्पी जारी


सरायकेला:- जिला सिविल सर्जन कार्यालय के हालिया निर्णयों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी चयन को लेकर पांच दिनों के भीतर दो अलग-अलग आदेश जारी होने से पूरे प्रकरण पर विभाग की मंशा पर भी उंगली उठने लगी है।

3 दिसंबर 2025 को जारी पत्रांक 2363 के माध्यम से सिविल सर्जन कार्यालय ने पूर्व प्रभारी डॉ. प्रमिला कुमारी को फिर से गम्हरिया CHC का प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया था। गौरतलब है कि डॉ. प्रमिला कुमारी पूर्व में वित्तीय अनियमितताओं और अव्यवस्थाओं के आरोपों को लेकर चर्चाओं में रही हैं, जिसके कारण यह आदेश शुरुआत से ही विवादित माना जा रहा था।
इस बीच, 5 दिसंबर को लोक आलोक न्यूज ने गम्हरिया CHC से जुड़े भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में स्वास्थ्य केंद्र में वर्षों से चली आ रही गड़बड़ियों, मृत बोलेरो पर ईंधन खरीद की कहानी, तथा CSR में करोड़ों के संदिग्ध बिलों को विस्तार से उजागर किया गया था। खबर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई।
इसके बाद 8 दिसंबर को सिविल सर्जन कार्यालय ने पत्रांक 2408 जारी करते हुए 3 दिसंबर के आदेश को विलोपित कर दिया। नए आदेश में डॉ. क्रिस्टोफर बेसरा, चिकित्सा पदाधिकारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आदित्यपुर-गम्हरिया को गम्हरिया CHC का प्रभार सौंप दिया गया । इस निर्णय को विभाग की एक बड़ी बैकफुट कार्रवाई माना जा रहा है।
4 करोड़ के संदिग्ध CSR बिल पर बढ़ी सरगर्मी
हालांकि, आदेश बदलने के बावजूद विभाग की सबसे बड़ी चुनौती अब भी अनसुलझी है। अमलगम कंपनी द्वारा CSR फंड के तहत प्रस्तुत किए गए लगभग 4 करोड़ रुपये के बिल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हैं। सूत्रों के अनुसार गम्हरिया CHC में 3 लाख रुपये का भी वास्तविक निर्माण या विकास कार्य नहीं हुआ है इसके बावजूद करोड़ों का बिल पास करने की तैयारी चल रही है और विभाग इस पूरे मामले पर अब तक चुप्पी साधे हुए है।
आरोप है कि यह बिल विभागीय मिलीभगत से पास कराने की तैयारी थी और प्रभारी बदलने का सिलसिला भी इसी मुद्दे से जुड़ा माना जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, वरीय अधिकारियों से लेकर स्थानीय इकाइयों तक “सिस्टम के तहत सेटिंग” की चर्चा ज़ोरों पर थी।
विभागीय चुप्पी से बढ़े संशय
गम्हरिया स्वास्थ्य केन्द्र में काम के अनुपात में प्रस्तुत बिल की राशि अपने आप में कई सवाल खड़े करती है। विभाग द्वारा अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया है, जिससे संदेह और गहरा गया है। हालांकि इस मामले में लोग दबे जुबान तले व्यापक जांच की मांग करने लगे है। अब सभी की निगाहें इस बात पर लगी हैं कि क्या विभाग अमलगम कंपनी के बिल की जांच कराएगा या यह प्रकरण भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।



