‘मैं कौन हूं, कहां से आया और कहां जाना है’, संत विज्ञान देव जी ने बताया आत्मज्ञान का महत्व



जमशेदपुर : विहंगम योग के संत विज्ञान देव जी ने अपने प्रवचन के दौरान आत्मज्ञान और अंतर्मुखता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सवाल किया कि मनुष्य कौन है, कहां से आया है, उसका लक्ष्य क्या है और उसे कहां जाना है। उन्होंने कहा कि जो शाश्वत और नित्य है, वह आत्मा है, लेकिन मनुष्य का ध्यान अधिकतर बाहरी संसार और इंद्रियों के विषयों में लगा रहता है।


उन्होंने कहा कि नश्वर और जड़ शरीर के पीछे चेतन आधार क्या है, यह अंतर्मुखता का विषय है। मनुष्य जीवन के प्रवाह में आगे बढ़ता रहता है और सामाजिक जीवन के लिए आवश्यक ज्ञान भी जरूरी है, लेकिन उसके साथ अंतर की यात्रा भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जीव विभिन्न शरीरों में भटकता रहता है और जीवन के सत्य को समझने के लिए आत्मा तथा परमात्मा के स्वरूप पर चिंतन जरूरी है।
संत विज्ञान देव जी ने कहा कि मनुष्य शांति और कामनाओं की पूर्ति चाहता है, लेकिन आत्मज्ञान के प्रति उतना सजग नहीं रहता। उन्होंने ऋषियों की उक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आत्मज्ञान नहीं हो सके तो दुनिया भर का ज्ञान हासिल करने के उद्देश्य और जीवन की सार्थकता पर विचार करना चाहिए। उन्होंने आध्यात्मिक चिंतन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि ‘मैं कौन हूं, कहां से आया और कहां जाना है’ जैसे प्रश्नों के उत्तर के लिए साधना और योग के पथ पर चलना होगा।


