डॉ बीपी केशरी की 10वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, झारखंड आंदोलन को दी थी बौद्धिक दिशा

रांची :डॉ बीपी केशरी की 10वीं पुण्यतिथि 14 अगस्त को मनाई गई। इस मौके पर मोरहाबादी स्थित जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय और पिठौरिया के नागपुरी केंद्र में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। डॉ बीपी केशरी झारखंड आंदोलनकारी, नागपुरी कवि, लेखक, बुद्धिजीवी और विचारक थे। अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में उन्होंने स्वर्गीय डॉ रामदयाल मुंडा के साथ मिलकर आंदोलन को वैचारिक और बौद्धिक आधार देने में अहम भूमिका निभाई। वह जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के संस्थापकों में भी शामिल थे।


डॉ केशरी ने नागपुरी गीतों और कविताओं का बड़ा संग्रह तैयार किया था, जिसका नाम ‘नागपुरी कवि और उनका काव्य’ था। उन्होंने वर्ष 1951 से गीतों का संकलन शुरू किया था और यह काम वर्ष 2012 तक जारी रहा। उन्होंने ‘छोटानागपुर का इतिहास’ समेत कई पुस्तकों की रचना की। उनका पूरा जीवन झारखंडी मुद्दों पर चिंतन, लेखन और आंदोलनों को समर्पित रहा। उनका जन्म एक जुलाई 1933 को हुआ था और 14 अगस्त 2016 को निधन हुआ। उन्हें विक्रमशिला विद्यापीठ विद्यासागर अवार्ड, झारखंड रत्न, भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान, झारखंड गौरव सम्मान और राजभाषा सम्मान समेत कई पुरस्कार मिले थे।


