संताल समाज का पांच दिवसीय सोहराय पर्व 8 नवंबर से शुरू होगा

जमशेदपुर : संताल समाज के प्रमुख पर्व सोहराय की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत 8 नवंबर को पारंपरिक ‘उम-नड़का’ अनुष्ठान के साथ होगी। धाड़ दिशोम माझी परगना महाल ने समाज के सभी गांवों से एक ही तिथि और पारंपरिक नियमों के अनुसार पर्व मनाने की अपील की है। देश परगना बैजू मुर्मू ने कहा कि एक साथ सोहराय मनाने से संताल समाज की सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक एकता मजबूत होगी।


घाटशिला के पावड़ा में देश परगना बैजू मुर्मू की अध्यक्षता में धाड़ दिशोम माझी परगना महाल की बैठक हुई। इसमें आदिवासी संताल समाज के पर्व-त्योहारों में एकरूपता लाने और सामाजिक एकता मजबूत करने पर चर्चा की गई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 8 नवंबर को उम-नड़का, 9 नवंबर को गोट बोंगा, तीसरे दिन दाकाय माहा, चौथे दिन खूंटाव माहा और पांचवें दिन जाजले माहा का आयोजन होगा। बैजू मुर्मू ने महाल के अंतर्गत आने वाले सभी आदिवासी गांवों के माझी बाबा, नायके बाबा और जोग माझी से निर्धारित तिथि पर पर्व की शुरुआत कराने की अपील की।
बैजू मुर्मू ने कहा कि समाज के पर्व-त्योहारों में एकरूपता बनाए रखना जरूरी है। सभी गांवों में एक ही तिथि और पारंपरिक नियमों के अनुसार पर्व मनाने से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को मजबूती मिलेगी। महाल के पदाधिकारियों ने भी लोगों से निर्धारित पारंपरिक तिथि पर सोहराय मनाने की अपील की। बैठक में माझी परगना महाल के सलाहकार हरिपोदो मुर्मू, टीएसी सदस्य जोसाई मार्डी, लखन मार्डी, नवीन मुर्मू, सुरेंद्र टुडू, बिंदे सोरेन, जगदीश बास्के और बिपिन चंद्र मुर्मू मौजूद थे।


