शीर्ष माओवादी नेता ‘किशन दा’ की जेल में मौत, दशक की नक्सल सक्रियता का अंत

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रांची : प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के वरिष्ठ पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस, जिन्हें ‘किशन दा’ के नाम से भी जाना जाता था, की शुक्रवार तड़के रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उनकी हालत लंबे समय से ख़राब चल रही थी और स्वास्थ्य में गिरावट के कारण उन्हें पहले राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (RIMS) में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उनके शरीर को आगे की कार्रवाई के लिए पोस्टमॉर्टेम के लिए भेजा गया है।

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प्रशांत बोस 80 वर्ष से अधिक उम्र के थे और वे वर्षों से नक्सल आंदोलन में शीर्ष रणनीतिकार और नेता के रूप में सक्रिय रहे थे। उन्हें नवंबर 2021 में झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों ने सहेकला‑खरसावां इलाके से गिरफ्तार किया था और उस समय उनके सिर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम भी घोषित था। गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में बंद थे और कई राज्यों में माओवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में उनका नाम था। बोस के निधन से संगठन में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

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