बढ़ती जनसंख्या और शहरी विकास के बीच सार्वजनिक शौचालयों की आवश्यकता : एके श्रीवास्तव



Saraikela (संजीव मेहता) :आज के आधुनिक और तेजी से विकसित होते युग में सरकार, सामाजिक संस्थाएं, उद्योग समूह और कई दिग्गज लोग आम जनता की सुविधा के लिए अनेक प्रकार की निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं. गर्मी के दिनों में जगह-जगह ठंडे पेयजल की व्यवस्था, राहगीरों के लिए प्याऊ, निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, रक्तदान शिविर, गरीबों के लिए भोजन वितरण, बस स्टैंडों पर विश्राम स्थल, सार्वजनिक बैठने की व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पार्कों का निर्माण, जरूरतमंदों के लिए दवा वितरण और अन्य सामाजिक सहायता कार्य समाज के लिए अत्यंत सराहनीय हैं. ये सभी प्रयास मानव सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं. लेकिन इन सभी सुविधाओं के बावजूद आज भी शहरों के सामने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गंभीर समस्या बनी हुई है — सार्वजनिक शौचालयों की कमी. विशेष रूप से जमशेदपुर शहर में बिष्टुपुर से टेल्को तक के मुख्य मार्गों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सड़क किनारे पर्याप्त पब्लिक वॉशरूम उपलब्ध नहीं हैं. कहीं-कहीं सुलभ शौचालय जरूर हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है और कई स्थानों पर वे लोगों की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त नहीं हैं. इसके कारण आम जनता, विशेष रूप से महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बाहर से आने वाले यात्रियों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. महिलाओं के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है. कई बार लंबे समय तक सार्वजनिक शौचालय नहीं मिलने के कारण उन्हें असुविधा, शर्मिंदगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह स्थिति अत्यंत कष्टदायक होती है. बाजारों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों लोगों को प्रतिदिन इस समस्या से गुजरना पड़ता है. यह केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि मानव गरिमा, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण मुद्दा है. आज शहरों की बढ़ती जनसंख्या और लगातार बढ़ते बाजार एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि सरकार सड़क किनारे निश्चित दूरी पर आधुनिक सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था करे. सरकार चाहे तो यह कार्य स्वयं कर सकती है या फिर सरकारी टेंडर के माध्यम से निजी एजेंसियों और ठेकेदारों को इसकी जिम्मेदारी दी जा सकती है. मुख्य सड़कों, बाजारों, चौक-चौराहों, बस स्टैंड, पार्क, रेलवे स्टेशन, औद्योगिक क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों के पास कुछ दूरी-दूरी पर पब्लिक वॉशरूम बनाए जाने चाहिए, ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े. यह मांग सीनियर सिटीजन फोरम के संरक्षक एके श्रीवास्तव ने सरकार से की है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण से शहर को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होंगे. सबसे पहला लाभ स्वच्छता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में होगा. खुले स्थानों पर गंदगी और अस्वच्छता कम होगी, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा घटेगा. शहर अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित दिखाई देगा. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित और सम्मानजनक सुविधा मिलेगी. बाहर से आने वाले पर्यटकों, व्यापारियों और यात्रियों पर भी शहर की सकारात्मक छवि बनेगी. इससे “स्वच्छ भारत अभियान” और शहरी विकास की योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी.



