टाटा स्टील ने शुरू किया भारतीय स्टील उद्योग का अपनी तरह का पहला COG इंजेक्शन प्रोजेक्ट

मुंबई : टाटा स्टील मेरामंडली ने ब्लास्ट फर्नेस-1 में कोक ओवन गैस (COG) इंजेक्शन प्रोजेक्ट शुरू किया है। कंपनी के मुताबिक यह भारतीय स्टील उद्योग में अपनी तरह की पहली पहल है। इस प्रोजेक्ट से जीवाश्म ईंधन की खपत और CO2 उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है। कंपनी ने इसे 2045 तक Net Zero लक्ष्य हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम बताया है। टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट–टेक्नोलॉजी, R&D, NMB और Graphene सुभोध पांडे ने कहा कि प्रोसेस गैसों का ज्यादा इस्तेमाल कर बाहरी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की यह पहल सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में कंपनी के प्रयासों को मजबूत करती है। कंपनी कम कार्बन वाली तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू करने पर काम कर रही है।

टाटा स्टील मेरामंडली के वाइस प्रेसिडेंट–ऑपरेशंस सुधीर कुमार मेहता ने कहा कि यह प्रोजेक्ट ऑपरेशन की दक्षता बढ़ाने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम करने का उदाहरण है। एक इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट में COG हाइड्रोजन और हाइड्रोकार्बन से भरपूर बाय-प्रोडक्ट गैस होती है। इसका इस्तेमाल आम तौर पर बिजली उत्पादन, हीटिंग या फ्लेयरिंग में किया जाता है। टाटा स्टील ने टेक्नोलॉजी पार्टनर M/s Paul Wurth-SMS और उपकरण आपूर्तिकर्ता M/s Kobelco की मदद से COG को ट्यूयर्स के जरिए ब्लास्ट फर्नेस में इंजेक्ट करने की व्यवस्था लागू की है। यहां यह गैस रिडक्टेंट के रूप में जीवाश्म ईंधन की जगह इस्तेमाल होगी।
कंपनी के अनुसार इस तकनीक से जीवाश्म ईंधन की खपत और CO2 उत्सर्जन कम करने के साथ ब्लास्ट फर्नेस को तीन ईंधन वाली प्रणाली पर चलाने का मौका मिलेगा। इससे ऑपरेशन में लचीलापन और दक्षता बढ़ेगी। कंपनी का कहना है कि एडवांस्ड इंजेक्शन टेक्नोलॉजी को सुरक्षित और स्थिर तरीके से चलाने की यह पहल ग्रीन स्टील उत्पादन की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। टाटा स्टील इससे पहले ब्लास्ट फर्नेस में कोल बेड मीथेन, हाइड्रोजन और बायोचार इंजेक्शन जैसी कम कार्बन तकनीकों का भी सफल प्रदर्शन कर चुकी है।


