विश्व पर्यावरण दिवस पर सोना देवी विश्वविद्यालय में रचनात्मक प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन


Jharkhand : विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर सोना देवी विश्वविद्यालय में पोस्टर एवं स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 23 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी संवेदनशील सोच, सामाजिक जिम्मेदारी एवं रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने अपने आकर्षक पोस्टरों एवं प्रेरणादायी स्लोगनों के माध्यम से जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त समाज, स्वच्छ पर्यावरण एवं हरित भविष्य का सशक्त संदेश दिया। प्रतिभागियों की प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि युवा पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग, जागरूक एवं प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ० सुभाष होरे, डॉ० कुसुम कुमारी लकड़ा एवं धारणी महतो की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से विद्यार्थियों ने अनुकरणीय प्रतिभा का प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गरिमा को गौरवान्वित किया।
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ० नीत नयना ने कहा कि —
“विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को समझने और निभाने का अवसर है। पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विद्यार्थियों की जागरूक भागीदारी यह दर्शाती है कि आने वाली पीढ़ी धरती को बचाने के लिए संकल्पित है।”
कुलपति प्रोफेसर डॉ० ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने अपने संबोधन में कहा कि —
“प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी मानव सभ्यता का भविष्य सुरक्षित रहेगा। ऐसे रचनात्मक आयोजन विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना, नैतिक मूल्यों एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलता को विकसित करते हैं। विश्वविद्यालय सदैव शिक्षा के साथ सामाजिक दायित्वों के निर्वहन हेतु प्रतिबद्ध है।”
कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि —
“धरती केवल हमारी नहीं, आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। हमें प्रकृति से उतना ही लेना चाहिए जितनी आवश्यकता हो और उसे सुरक्षित रखने का संकल्प भी लेना चाहिए। युवा शक्ति यदि पर्यावरण संरक्षण का बीड़ा उठा ले, तो एक स्वच्छ, हरित एवं समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।”
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण हेतु सामूहिक संकल्प लिया गया। पूरे विश्वविद्यालय परिसर में पर्यावरण जागरूकता, सकारात्मक ऊर्जा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी वातावरण देखने को मिला।



