दहेज मुक्त समाज का संकल्प: सोहर में 11 आदिवासी जोड़ों ने लिए सात फेरे, गूंजे वैदिक मंत्र

महुआडांड़ : महुआडांड़ अब पैसे के अभाव में किसी भी बहन-बेटी की शादी नहीं रुकेगी” — इसी संकल्प के साथ प्रखंड के सोहर पंचायत के सोहर गांव में शनिवार को सामाजिक एकता का अद्भुत नजारा दिखा। उत्तर प्रदेश के प्रेरणा परमार्थ आश्रम के सौजन्य से आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में आर्थिक रूप से कमजोर 11 आदिवासी जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर दांपत्य जीवन की शुरुआत की।


ढोल-नगाड़ों पर थिरके बाराती, बेटियां बोलीं- मिला नया जीवन
दुर्गा मंडप परिसर सुबह से ही उल्लास से सराबोर था। 12 दूल्हे ढोल-नगाड़ों के साथ बारात लेकर पहुंचे। गांव की महिलाओं ने पारंपरिक झूमर गीतों से स्वागत किया। पंडित ने सभी जोड़ों का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया। कन्यादान की रस्म में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नवविवाहिता की आंखें भर आईं, कहा कभी सोचा नहीं था कि इतने धूमधाम से शादी होगी। आज हमें नया जीवन मिला है।
संस्कृति बचानी है तो ऐसे आयोजन जरूरी”: रंजीत सिंह
सामूहिक विवाह समिति के संयोजक रंजीत सिंह ने मंच से भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “यह आदिवासी बहुल क्षेत्र है। अपनी परंपरा और संस्कृति को अक्षुण्ण रखना है साथ ही दहेज जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए सामूहिक विवाह सबसे सशक्त माध्यम है।उन्होंने नवदंपतियों को आशीर्वाद देते हुए कहा, “आज से ये बेटियां हमारी जिम्मेदारी हैं। आपका जीवन तभी सुखी रहेगा जब आचरण सुसंस्कृत होगा। एक-दूसरे का सम्मान करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
हर साल होगी बेटियों की शादी: आश्रम का संकल्प
वरिष्ठ परमार्थी प्रकाश सिंह ने घोषणा की कि प्रेरणा परमार्थ आश्रम हर साल इस क्षेत्र की जरूरतमंद बेटियों का चयन कर उनकी शादी की संपूर्ण जिम्मेदारी उठाएगा। सभी 11 जोड़ों को पलंग, अलमीरा, बर्तन, वस्त्र और अन्य गृहस्थी का सामान उपहार स्वरूप दिया गया।
इन्होंने निभाई अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में रंधीर सिंह, धीरज कुमार सिंह, कृपा शंकर सिंह, मनोज कुमार सिंह का विशेष योगदान रहा। वहीं वनवासी कल्याण केंद्र के जिलाध्यक्ष अजय उरांव, स्थानीय जन प्रतिनिधि और दर्जनों युवा कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था संभाली। समारोह में हजारों ग्रामीणों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।यह सामूहिक विवाह सिर्फ 11 घरों में खुशियां लेकर नहीं आया, बल्कि पूरे इलाके को दहेज मुक्त, नशा मुक्त और धर्मांतरण मुक्त समाज का संदेश दे गया।


