आरक्षण की नए सिरे से समीक्षा हो, क्रीमीलेयर को बाहर करे सरकार : आनंद मोहन

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जमशेदपुर : बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन ने आरक्षण व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की मांग की है। जमशेदपुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आरक्षण लागू किए जाने के समय परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन अब काफी बदलाव आ चुका है। उनका कहना है कि क्रीमीलेयर को अलग कर आरक्षण व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री, मंत्री, डीजीपी या पुलिस अफसर जैसे बड़े पदों तक पहुंच चुके हैं, उनके परिवारों को भी आरक्षण का लाभ क्यों दिया जाना चाहिए।

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आनंद मोहन ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बाबा भीमराव अंबेडकर ने भी इसे लागू करते समय हर दस साल में पुनर्समीक्षा की बात कही थी, लेकिन अब तक इस पर कोई समीक्षा नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट की राजनीति के कारण आरक्षण व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चल रही है। आनंद मोहन ने यह भी कहा कि आरक्षण जब लागू हुआ था, उस समय 85 फीसदी सवर्ण राज करते थे, जबकि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।

बिहार और झारखंड के बंटवारे का जिक्र करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि उस समय कहा गया था कि बिहार में सिर्फ आलू, बालू और लालू बच जाएंगे, लेकिन उनके अनुसार आज बिहार प्रगति के रास्ते पर है और झारखंड पिछड़ गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड की स्थिति का जवाब यहां सत्ता में बैठने वाले लोगों को जनता को देना चाहिए। बिहार की नई सरकार को लेकर उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी सरकार के काम का पहले आकलन किया जाना चाहिए और उसके बाद ही कोई फैसला या राय बनाई जानी चाहिए।

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