दलमा अभयारण्य में पर्यटक कॉटेज निर्माण पर सवाल, सीइसी ने चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

Advertisements

जमशेदपुर : दलमा वन्यजीव अभयारण्य में पर्यटक कॉटेज के निर्माण को लेकर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीइसी) ने झारखंड सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिट याचिका से जुड़े इस मामले में समिति ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, वन विभाग और पर्यटन विभाग के अधिकारियों से निर्माण की स्वीकृतियों, वन भूमि की स्थिति, पेड़ों की कटाई, वित्तीय आवंटन और वैधानिक अनुमतियों का विवरण मांगा है। सभी संबंधित दस्तावेज चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। वर्ष 2026 में याचिकाकर्ता प्रतीक शर्मा ने अभयारण्य के भीतर कथित रूप से आवश्यक अनुमति लिए बिना पर्यटक कॉटेज बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी।
सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने बताया कि दलमा अभयारण्य के मकुलाकोचा और पिंड्राबेड़ा में झारखंड सरकार का वन विभाग, पर्यटन विभाग की वित्तीय सहायता से कॉटेज का निर्माण करा रहा है। आवेदक का आरोप है कि निर्माण से पहले राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति नहीं ली गई और वन संरक्षण कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन भी नहीं हुआ। आवेदन में कहा गया है कि वर्ष 2020 की स्वीकृत अभयारण्य प्रबंधन योजना में नए पर्यटक कॉटेज बनाने का प्रावधान नहीं है। योजना के अध्याय आठ में शामिल इको-डेवलपमेंट गतिविधियों में भी ऐसे निर्माण का उल्लेख नहीं है। आवेदक ने स्वीकृत योजना से बाहर की निर्माण गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने, बिना पूर्व अनुमति निर्माण कराने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई की सिफारिश करने की मांग की है। साथ ही इको-सेंसिटिव जोन में पर्यटन सुविधाओं के लिए आवश्यक जोनल मास्टर प्लान या पर्यटन योजना की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कथित अवैध कॉटेज, होटल और रिसॉर्ट हटाने का आग्रह किया है।
सुनवाई में वन विभाग की ओर से अधिवक्ता रेवंत सोलंकी और हाथी परियोजना की उप वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक सबा अंसारी उपस्थित थीं, जबकि पर्यटन विभाग के सचिव की ओर से कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। सीइसी ने पर्यटन विभाग के सचिव से कॉटेज निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति, आवंटित राशि, वैधानिक मंजूरियों के सत्यापन, पर्यटन मास्टर प्लान की स्थिति, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और समझौता ज्ञापनों (एमओयू) की जानकारी भी मांगी है। संबंधित विभागों को चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट और दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

Advertisements
https://bashisthaonline.in
Advertisements
Advertisements

About The Author

You may have missed