बिरसानगर की ज़मीन पर ‘खामोशी की सियासत’

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जमशेदपुर : जमशेदपुर के बिरसानगर में ज़मीन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक संकट का रूप ले चुका है। एशिया की बड़ी बस्तियों में शामिल बिरसानगर में अतिक्रमण, बुलडोजर कार्रवाई और भूमि माफिया की सक्रियता से आम लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। पूर्व में रघुवर दास के कार्यकाल में अतिक्रमण हटाओ अभियान के गंभीर सामाजिक-राजनीतिक परिणाम देखे गए थे, जबकि विधायक सरयू राय के दौर में लोगों को वैधानिक मान्यता की उम्मीद जगी, जो पूरी नहीं हो सकी।चुनाव के बाद एक अधिवक्ता हत्याकांड और उससे जुड़े आरोपी की रिहाई के बाद उसके कथित रूप से भूमि माफिया के तौर पर सक्रिय होने से इलाके की राजनीति फिर गरमा गई है। आरोप है कि बिरसानगर से गोविंदपुर तक हुए नए अतिक्रमणों में बड़ी भूमिका एक ही गिरोह की है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि भूमि माफिया का असली संरक्षक कौन है।आजसू पार्टी के प्रवक्ता अप्पू तिवारी ने उपायुक्त से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। वहीं भाजपा नेता अंकित आनंद ने अवैध अतिक्रमण के लिए अंचल राजस्व कर्मियों की शिथिलता को जिम्मेदार ठहराते हुए नियमित निरीक्षण पर जोर दिया है। बिरसानगर के लोग अब भी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का इंतजार कर रहे हैं।

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