कुर्सी नहीं, गमलों पर बैठ रही जनता: बिक्रमगंज अनुमंडल कार्यालय बना जुगाड़ का अड्डा…जुगाड़ पर चल रहा बिक्रमगंज अनुमंडल कार्यालय, जनता की हो रही अनदेखी

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विक्रमगंज / बिहार :- कहते हैं कि सरकारी कार्यालय आम जनता की सुविधा के लिए बनाए जाते हैं, ताकि अधिकारी वहां उपस्थित रहकर लोगों की समस्याओं का समाधान करें और सरकार की योजनाओं को सुचारू रूप से ज़मीन तक पहुंचाया जा सके। लेकिन बिक्रमगंज अनुमंडल कार्यालय की स्थिति इस सोच के बिल्कुल विपरीत नजर आती है। यहां व्यवस्था से ज्यादा अव्यवस्था का बोलबाला दिख रहा है, जो सीधे-सीधे आम जनता की परेशानी को बढ़ा रहा है।

बता दें कि इस अनुमंडल कार्यालय में प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। कोई पेंशन से जुड़ी परेशानी लेकर आता है तो कोई जमीन, राशन कार्ड या अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए। लेकिन हकीकत यह है कि न तो समस्याओं का समय पर समाधान हो पाता है और न ही यहां आने वाले लोगों के लिए बैठने तक की समुचित व्यवस्था है।

पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, वह और भी चौंकाने वाली है। कार्यालय परिसर में रखे गए फूलों के गमलों की मिट्टी खाली कर दी गई है और उन्हीं गमलों को लोग मजबूरी में स्टूल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोग तो जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं। यह दृश्य न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि आम नागरिकों के सम्मान के साथ भी सीधा खिलवाड़ है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर इन गमलों की जरूरत क्या थी? अगर ये गमले अतिरिक्त थे, तो क्या इनकी खरीदारी सरकारी फंड के दुरुपयोग का मामला नहीं बनता? और अगर ये अतिरिक्त नहीं थे, तो इनमें लगे पौधे कहां गए? क्या उनकी देखभाल की कोई जिम्मेदारी तय की गई थी या फिर सब कुछ यूं ही छोड़ दिया गया?

यह स्थिति उस समय और भी गंभीर हो जाती है जब बिहार में सुशासन की बात की जाती है। Nitish Kumar के नेतृत्व में सरकार अक्सर बेहतर प्रशासन और जनसेवा के दावे करती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। आखिर ऐसा क्या हो गया कि लोगों को सरकारी कार्यालय में जमीन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है?

जरूरत है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही, आम जनता के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि सरकारी कार्यालय सच में जनता के लिए बने रहें, न कि केवल कागजों तक सीमित रह जाएं।

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