विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस : देश याद कर रहा है 1947 का दर्द…

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नई दिल्ली। आज देशभर में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन हमें 14 अगस्त 1947 को हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन के उस काले अध्याय की याद दिलाता है, जब करोड़ों लोग अपने घर-बार छोड़ने पर मजबूर हो गए, लाखों परिवार बिछड़ गए और अनगिनत मासूमों की जानें गईं। आज़ादी के उत्साह के साथ उस समय देश ने ऐसी पीड़ा झेली, जिसका दर्द आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में इस दिन को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी, ताकि आने वाली पीढ़ियां उस भयावह त्रासदी को याद रखें और उससे सीख लेकर देश में एकता, भाईचारे और शांति का वातावरण बना रहे।

इस अवसर पर आज देशभर में विभिन्न कार्यक्रम, प्रदर्शनियां, गोष्ठियां और संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। ऐतिहासिक तस्वीरें, विभाजन पीड़ितों के संस्मरण और दस्तावेज़ प्रदर्शित किए जा रहे हैं। स्कूल-कॉलेजों में विशेष परिचर्चा आयोजित की जा रही है, ताकि युवा पीढ़ी को यह समझाया जा सके कि आज़ादी का मूल्य सिर्फ संघर्ष में नहीं, बल्कि लाखों बलिदानों में छुपा है।

राजधानी दिल्ली से लेकर देश के कोने-कोने में लोगों ने मोमबत्ती जलाकर विभाजन में अपनी जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर #VibhajanVibhishikaSmritiDiwas और #PartitionHorrorsRemembranceDay ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग अपने पूर्वजों की यादों और उस दौर की कहानियों को साझा कर रहे हैं।

इतिहासकारों के अनुसार, 1947 का विभाजन मानव इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे दुखद जन-स्थानांतरण था। लगभग 1.4 करोड़ लोग पाकिस्तान और भारत के बीच पलायन करने पर मजबूर हुए, जबकि अनुमानित 10 से 15 लाख लोगों की इस हिंसा में जान चली गई। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग—कोई भी इस त्रासदी से अछूता नहीं रहा।

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें न केवल अपने इतिहास से रूबरू कराता है, बल्कि यह चेतावनी भी देता है कि नफरत और विभाजन की राजनीति किसी भी समाज को बर्बादी की ओर ले जा सकती है। यह दिन हमें एकजुट होकर आगे बढ़ने, शांति और सद्भाव को कायम रखने और देश की अखंडता की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।

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