अब बिना मास्टर डिग्री भी कर सकेंगे PhD, 4 वर्षीय UG छात्रों के लिए बदले नियम


रांची : रांची विश्वविद्यालय ने पीएचडी में दाखिले की पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। यूजीसी के 2022 के नियमों और नई शिक्षा नीति को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने पीएचडी प्रवेश के नए नियम तैयार किए हैं। नई व्यवस्था के तहत चार वर्षीय स्नातक डिग्री पूरी करने वाले मेधावी छात्र अब मास्टर डिग्री किए बिना सीधे पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे। चार वर्षीय स्नातक में 75 प्रतिशत अंक या निर्धारित सीजीपीए हासिल करने वाले छात्र इसके पात्र होंगे। वहीं मास्टर डिग्री या एमफिल करने वाले अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक की पात्रता रखी गई है, जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी।


नेट, सीएसआईआर-नेट, गेट और अन्य संबंधित पात्रता परीक्षाओं में सफल उम्मीदवारों को विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा से छूट मिल सकती है और उनका चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जा सकेगा। विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के चयन में 70 प्रतिशत वेटेज प्रवेश परीक्षा और 30 प्रतिशत इंटरव्यू को दिया जाएगा। प्रवेश परीक्षा में शोध पद्धति और संबंधित विषय से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। पीएचडी में दाखिला मिलने के बाद शोधार्थियों के लिए 12 क्रेडिट का कोर्स वर्क पूरा करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य शोध की पद्धति और आवश्यक विषयों की समझ विकसित कर शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण रिसर्च के लिए तैयार करना है।
नई व्यवस्था में पीएचडी की न्यूनतम अवधि तीन वर्ष और अधिकतम अवधि छह वर्ष निर्धारित की गई है। विशेष परिस्थितियों में लागू नियमों के अनुसार शोधार्थियों को अतिरिक्त समय भी दिया जा सकेगा। महिला शोधार्थियों और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले शोधार्थियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिला शोधार्थियों को नियमों के तहत मातृत्व और चाइल्ड केयर लीव की सुविधा भी मिलेगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि इन बदलावों से चार वर्षीय स्नातक करने वाले प्रतिभाशाली छात्रों को शोध के क्षेत्र में जल्दी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और नेट, सीएसआईआर-नेट तथा गेट जैसी परीक्षाएं पास कर चुके अभ्यर्थियों के लिए प्रवेश प्रक्रिया भी आसान होगी।


