2 बच्चों की हत्या में मां को उम्रकैद, 13 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला



जमशेदपुर : साल 2013 में अपने दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में दोषी शमा परवीन की उम्रकैद की सजा झारखंड हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है। जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने उसकी क्रिमिनल अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य शमा की संलिप्तता की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं। मामला साकची थाना क्षेत्र का है। 19 मई 2013 की शाम शमा अपने चार वर्षीय बेटे कासिफ उमर और दो वर्षीय बेटे शरीफ उमर के साथ मंजूर आलम के घर गई थी। रात में घर नहीं लौटने पर पति ने उसकी तलाश की। अगले दिन शमा सड़क किनारे बेसुध मिली, जबकि कुछ समय बाद दोनों बच्चों के शव नाले में कपड़े में लिपटे मिले। उनके शरीर पर चोट के निशान थे।पुलिस को घटनास्थल से खून के निशान, खून से सना कपड़ा और अन्य सामान मिले। जांच अधिकारी के मुताबिक शमा के कपड़ों और वहां मिले साड़ी के पल्लू में समानता थी। पुलिस ने उसके कथित स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर खून लगी ब्लेड और चूड़ियां भी बरामद की थीं। मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था और अभियोजन के कई गवाह बाद में अपने बयान से पलट गए। पोस्टमार्टम में दोनों बच्चों की मौत जहर से होने की बात सामने आई थी। शरीफ की गर्दन और दोनों हाथों पर कट के निशान थे, जबकि कासिफ के शरीर पर रासायनिक जलने के निशान मिले थे। शमा ने हत्या से इनकार करते हुए कहा था कि वह कर्ज की रकम और गिरवी रखे गहने वापस लेने मंजूर आलम के घर गई थी, जहां उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ और बच्चों को पेप्सी पिलाने के बाद उनकी हत्या कर दी गई। हाईकोर्ट ने उसकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया।




