मिर्चैया फॉल सूखा, पर्यटन ठप-लापरवाही की भेंट चढ़ा महुआडांड़ का प्रमुख आकर्षण, गर्मी की पहली मार में ही उजड़ा पूरा सिस्टम

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लातेहार : महुआडांड़ अनुमंडल का प्रसिद्ध मिर्चैया फॉल इस बार गर्मी की शुरुआत में ही पूरी तरह सूखे की चपेट में आ गया है। कभी अपनी कल-कल बहती धारा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाना जाने वाला यह पर्यटन स्थल आज वीरान और बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। फॉल में पानी लगभग खत्म हो जाने से यहां की रौनक पूरी तरह गायब हो गई है और पर्यटकों की आवाजाही शून्य के करीब पहुंच गई है।कुछ ही सप्ताह पहले तक जहां पर्यटकों की भीड़, वाहनों की आवाजाही और स्थानीय दुकानों की चहल-पहल देखने को मिलती थी, वहीं अब वहां सन्नाटा पसरा है। सूखे पड़े पत्थर, बेजान झरना और उजड़ा माहौल यह बताने के लिए काफी है कि यह स्थल अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मी में जलस्तर गिरता है, लेकिन इस बार हालात बेहद चिंताजनक हैं। फॉल का पूरी तरह सूख जाना इस बात का संकेत है कि जल स्रोतों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई है। पहाड़ी जलधाराओं का सूखना, आसपास के जंगलों में कमी और वर्षा जल संचयन की व्यवस्था का अभाव इस स्थिति को और भयावह बना रहा है।इसका सबसे बड़ा असर उन स्थानीय लोगों पर पड़ा है, जिनकी आजीविका इस पर्यटन स्थल से जुड़ी हुई थी। फॉल के आसपास छोटी-छोटी दुकानें चलाने वाले, ठेला व्यवसायी, वाहन चालक — सभी की कमाई पूरी तरह ठप हो गई है। कई परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पर्यटन विकास के नाम पर सिर्फ कागजी योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस काम नहीं होता। जल संरक्षण, झरनों के पुनर्जीवन और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर कोई दीर्घकालिक योजना नहीं दिखाई देती।मिर्चैया फॉल का इस तरह सूख जाना कई बड़े सवाल खड़े करता है —क्या प्रशासन को इस स्थिति का अंदाजा नहीं थाक्या जल स्रोतों को बचाने के लिए कोई तैयारी नहीं की गई?क्या पर्यटन स्थलों की देखरेख केवल कागजों तक ही सीमित है अगर समय रहते इस दिशा में ठोस और कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो मिर्चैया फॉल का नाम सिर्फ इतिहास में रह जाएगा।

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