एशिया ग्रुप में की लीक मैसेज: जर्जर सड़कों और बुझी स्ट्रीट लाइटों से कराह रहा आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र, लेकिन एशिया अध्यक्ष चमचागिरी में व्यस्त, बोले उद्यमी बिल का भुगतान हम करें, और सुविधा के नाम पर मिले बदहाल सड़कें और अंधेरा

आदित्यपुर। आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, स्ट्रीट लाइट और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को लेकर उद्यमियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। औद्योगिक क्षेत्र की जर्जर सड़कों, खराब स्ट्रीट लाइट और अन्य समस्याओं को लेकर उद्यमियों का कहना है कि वे नियमित रूप से संबंधित मदों का भुगतान कर रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो रही हैं। सबसे बड़ा सवाल उद्यमी संगठन आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एशिया) की भूमिका को लेकर उठ रहा है। हाल के दिनों में जियाडा परिसर में एमडी वरुण रंजन के आगमन और बैठक के बाद एशिया के आधिकारिक ग्रुप में संगठन से जुड़े उद्यमियों ने संगठन के अध्यक्ष इन्दर अग्रवाल समेंत शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। ग्रुप में चल रही बहस में कुछ उद्यमियों ने अध्यक्ष इंदर अग्रवाल और अन्य पदाधिकारियों पर उद्यमी हितों की आवाज बुलंद करने के बजाय अधिकारियों की कथित चापलूसी में व्यस्त रहने का आरोप लगाया है। आक्रोशित उद्यमी यहां तक कह रहे हैं कि यदि नेतृत्व उद्यमियों की समस्याओं को उठाने में सक्षम नहीं है तो उसे कुर्सी खाली कर देनी चाहिए।

प्रमोद सिंह और विक्टर सिंह के दौर में होती थी उद्यमी हित की लड़ाई
एशिया के आधिकारिक ग्रुप में कई उद्यमियों ने मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए पुराने नेतृत्व का हवाला दिया। उनका कहना है कि प्रमोद सिंह और विक्टर सिंह के कार्यकाल में उद्यमियों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के सामने मजबूती से आवाज उठाई जाती थी। विरोध प्रदर्शन होता था लेकिन आज संगठन के नाम पर दलाली चापलूसी कर अपना उल्लू सीधा करने का काम किया जा रहा है।
उद्यमियों का आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्र में समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन संगठन के शीर्ष नेतृत्व इन मुद्दों पर निर्णायक आंदोलन करने के बजाय अधिकारियों के साथ मेल-मिलाप और बैठकों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं।
इंदर अग्रवाल के बचाव में आए राजीव रंजन मुन्ना भी निशाने पर
ग्रुप में लगातार अध्यक्ष इंदर अग्रवाल को निशाना बनाए जाने के बीच उनके बचाव में राजीव रंजन मुन्ना के सामने आने के बाद विवाद और तेज हो गया। आक्रोशित उद्यमियों ने उन्हें भी घेरना शुरू कर दिया। इससे एशिया के अंदर चल रहा असंतोष अब सार्वजनिक बहस का रूप लेता दिख रहा है। उद्यमियों का कहना है कि संगठन के पदाधिकारियों को किसी व्यक्ति विशेष का बचाव करने के बजाय औद्योगिक क्षेत्र की बदहाली के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उनका सवाल है कि जब उद्योगों से सुविधाओं के नाम पर लगातार शुल्क और बिल लिया जा रहा है तो फिर सड़कों की हालत इतनी खराब क्यों है? स्ट्रीट लाइटें क्यों नहीं जलतीं? उद्योगों को रोजमर्रा के कामकाज में होने वाली परेशानियों का स्थायी समाधान कब होगा?
सड़कें जर्जर, स्ट्रीट लाइट बंद, फिर भी जिम्मेदारों पर दबाव नहीं! आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। जगह-जगह सड़कें टूट चुकी हैं और गड्ढों के कारण भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हैं, जिससे शाम होते ही औद्योगिक क्षेत्र के कई हिस्से अंधेरे में डूब जाते हैं। उद्यमियों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र से सरकार और संबंधित एजेंसियों को राजस्व मिलता है। कंपनियां निर्धारित बिलों का भुगतान करती हैं। इसके बावजूद यदि बदले में सड़क, रोशनी और अन्य आधारभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं तो इसका जवाब मांगना संगठन की जिम्मेदारी है।
‘चमचागिरी नहीं, उद्यमियों के हक की लड़ाई चाहिए’
एशिया के भीतर उठ रही आवाजों का सबसे तीखा संदेश यही है कि संगठन को अधिकारियों की कथित ‘चमचागिरी’ से बाहर निकलकर उद्यमियों की वास्तविक समस्याओं पर सड़क से लेकर संबंधित विभाग के कार्यालय तक संघर्ष करना चाहिए। उद्यमियों का आरोप है कि संगठन का नेतृत्व यदि अपने निजी हितों को साधने में ज्यादा रुचि लेगा और सामूहिक समस्याओं पर चुप रहेगा तो फिर संगठन की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यही वजह है कि अब कुछ उद्यमी नेतृत्व परिवर्तन तक की मांग कर रहे हैं।
नाराज उद्यमी बैठकों से बना रहे दूरी
नाम नहीं छापने की शर्त पर एशिया के एक पदाधिकारी ने कहा की उद्यमी संगठन के कार्यशैली से इतने हताश हो चुके है कि अब बैठकों और कार्यक्रमों से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। बीते दिनों सरायकेला एसपी के स्वागत समारोह से भी उद्यमियों ने दूरी बना रखा था जिसकी वजह से संगठन के शीर्ष नेतृत्व अपने कंपनी के कर्मचारियों को बुलाकर उद्यमियों की भीड़ दिखाया।


