करम पर्व को लेकर बढ़ी रौनक, 16 सितंबर को जावा उठाव से शुरू होंगे खास अनुष्ठान



जमशेदपुर : शहर में प्रकृति पर्व करम (करमा) को लेकर आदिवासी-मूलवासी समाज में उत्साह बढ़ गया है। भादो महीने के आगमन के साथ पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष 22 सितंबर को करम पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। शहर के विभिन्न करम अखड़ों में आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने की तैयारी अंतिम चरण में है। सीतारामडेरा, मानगो-शंकोसाई, एग्रिको, कदमा और बारीडीह समेत कई इलाकों में आदिवासी उरांव समाज और अन्य मूलवासी संगठनों की बैठकें हो रही हैं, जिनमें पूजा के समय, सुरक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जावा उठाव की रूपरेखा तय की जा रही है।


सीतारामडेरा उरांव समाज समिति की अध्यक्ष सालु लकड़ा के अनुसार, मुख्य अनुष्ठान 16 सितंबर से शुरू होंगे। इस दिन कुंवारी कन्याएं और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-मांदर के साथ जुलूस निकालकर सुवर्णरेखा नदी तट जाएंगी और वहां से बालू लाकर बांस की टोकरियों में सात से नौ तरह के अनाज, जैसे चना, मूंग, कुर्थी, धान और जौ बोएंगी। 22 सितंबर तक युवतियां नियम-धर्म का पालन करते हुए सुबह-शाम जावारानी माता की पूजा करेंगी और करम गीतों पर नृत्य करेंगी। जावा को समृद्धि, नई सृष्टि और अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता है। 22 सितंबर की शाम करम वृक्ष की डाल अखड़े में स्थापित कर करम राजा की पूजा और करम-धरम की कथा होगी। अगले दिन 23 सितंबर को करम डाल और जावा का नदी या जलाशयों में विसर्जन किया जाएगा।


