JPSC धांधली: 15 अभ्यर्थियों की सूची बरामद, 10 का अंतिम चयन होने का दावा

रांची : JPSC परीक्षा में कथित धांधली की जांच के दौरान सीआईडी को तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते के लैपटॉप बैग से 15 अभ्यर्थियों की एक संदिग्ध सूची मिली थी। इसमें अभ्यर्थियों के रोल नंबर, इंटरव्यू की तारीख और डीएसपी व जेएएस जैसे प्रशासनिक पदों का ब्योरा हाथ से लिखा गया था। सीआईडी ने सूची का अंतिम परिणाम से मिलान किया, जिसमें 15 में से 10 अभ्यर्थियों के चयन की पुष्टि होने की बात सामने आयी। इनमें कश्मीरा हेम्ब्रम, रवि कुमार, महिमा सिंह, विवेक कुमार, जयदीप चौधरी, जनक राज, शालिनी राठी, सेजल सहरावत, विक्की और सरिता बारला के नाम शामिल हैं। जांच में तत्कालीन अध्यक्ष की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।

जांच के अनुसार, मार्च 2025 में बिचौलियों धर्मेंद्र, अभय तिवारी और रवि मास्टर के माध्यम से अध्यक्ष के सरकारी आवास पर टीडीपीएल (TDPL) के निदेशक रामबीर सिंह के साथ बैठक कराई गई थी। इसके बाद होटल रेडिसन ब्लू के रेस्टोरेंट में एल. खियांग्ते, रामबीर, सत्यपाल, धर्मेंद्र और सांत्वना प्रकाश की दूसरी बैठक हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, टीडीपीएल को परीक्षा का काम सौंपने के बदले 2 करोड़ रुपये नकद और कुल बिलिंग राशि पर 10% कमीशन तय हुआ था। इसी तरह, ब्लैकलिस्टेड कंपनी बिंसिस (Binsys) के निदेशक अरुण कुमार के साथ भी कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये नकद और 10% कमीशन की डील हुई, जिसमें से 1 करोड़ रुपये दिए जाने की बात कही गई है। सीआईडी को आइजोल स्थित खियांग्ते के निजी आवास पर ढ़ाई लाख रुपये पहुंचाने से जुड़े वित्तीय लेन-देन और यात्रा के साक्ष्य मिलने की जानकारी भी दी गई है।
सीआईडी के अनुसार, कॉल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण में एल खियांग्ते और अन्य आरोपियों के बीच संपर्क सामने आया। खियांग्ते के मोबाइल से मुख्य बिचौलिये धर्मेंद्र के नंबर पर अलग-अलग अवधियों में 267 बार, 65 बार और 8 बार बातचीत दर्ज होने की बात कही गई है। तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से 304 बार, आयोग के कर्मी सोनू कुमार से 139 बार और अभय तिवारी से 12 बार संपर्क के रिकॉर्ड भी मिलने का उल्लेख है। इसके अलावा, उमेश कुमार से 2 बार बातचीत और रामवीर सिंह से सीधे संपर्क के तकनीकी प्रमाण मिलने की बात कही गई है। अध्यक्ष के आवासीय कार्यालय से एफआरओ मुख्य परीक्षा के आठ अभ्यर्थियों के मूल प्रवेश पत्र भी जब्त किए गए। जांच में निविदा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र छपाई, ओएमआर शीट, मूल्यांकन और साक्षात्कार में कथित हेरफेर के आरोप भी सामने आए हैं। टीडीपीएल द्वारा निविदा हासिल करने के लिए फर्जी प्रतिस्पर्धी कंपनियां खड़ी करने और उसके लेखापाल के फोन से एक निजी स्थान पर उत्तर पुस्तिका लिखने का वीडियो मिलने की जानकारी दी गई है।


