फर्जी लाल बत्ती मामले में रवींद्र वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

धनबाद : चर्चित फर्जी लाल बत्ती और नकली राज्यमंत्री मामले में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव रवींद्र कुमार वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। वर्ष 2012 से चल रहे इस मामले में धनबाद पुलिस अब उनकी गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है। 11 अक्तूबर 2012 को तत्कालीन उपायुक्त के आदेश पर जिला परिवहन पदाधिकारी रविराज शर्मा ने मनईटांड़ टेंपल रोड निवासी रवींद्र वर्मा के खिलाफ धनबाद थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उन पर गृह मंत्रालय, भारत सरकार के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और जाली दस्तावेजों के जरिए खुद को गृह मंत्रालय की परामर्शदातृ परिषद का सदस्य बताने का आरोप है। साथ ही खुद को राज्यमंत्री के समकक्ष दर्जा प्राप्त होने का दावा कर प्रशासनिक अधिकारियों पर प्रभाव जमाने का भी आरोप लगाया गया था।

प्राथमिकी के अनुसार, रवींद्र वर्मा ने कथित तौर पर गृह मंत्रालय के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपनी निजी कार पर अवैध रूप से वीआईपी लाल बत्ती लगा रखी थी। इसके अलावा अपने निजी लेटर पैड पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ का अनधिकृत इस्तेमाल करने का भी आरोप है। तत्कालीन उपायुक्त की ओर से गृह मंत्रालय से दस्तावेजों का सत्यापन कराने पर वे फर्जी पाए गए थे। पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया था। खबर के अनुसार, रवींद्र वर्मा 14 वर्षों से गिरफ्तारी से बचते रहे हैं। तीन महीने पहले हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने और गिरफ्तारी पर लगी रोक हटने के बाद उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है। वर्ष 2012 में उनके खिलाफ कुर्की-जब्ती का इश्तेहार भी जारी हुआ था, जिसे बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर रद्द कर दिया गया था।


