भारत और यूएई में रक्षा क्षेत्र की बड़ी डील,

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दिल्ली: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रक्षा क्षेत्र में बड़ी रणनीतिक साझेदारी का इरादा जताया है। इसको लेकर सोमवार को दोनों देशों के बीच लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) पर दस्तखत हुए हैं। भारत और यूएई के बीच इस तरह का समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिसकी वजह से जियोपॉलिटिक्स में बहुत ही ज्यादा उथल-पुथल मचा हुआ है। दोनों देश इस तरह समझौते की ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई बातचीत के बाद बढ़े हैं। दोनों देश ने रक्षा क्षेत्र में जिस तरह से तालमेल का इरादा जताया है, उससे पाकिस्तान का मुस्लिम देशों के बीच भी घिरना तय है।बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अगले छह सालों में द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक दोगुना करने और एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी बनाने का संकल्प जताया.समझौते के तहत अबू धाबी की सरकारी कंपनी एडीएनओसी गैस अगले 10 सालों तक भारत की हिंदुस्तान पेट्रोलियम को हर साल 5 लाख मीट्रिक टन LNG की सप्लाई करेगी.

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एडीएनओसी गैस ने कहा कि इस नए करार के बाद भारत के साथ उसके कुल कॉन्ट्रैक्ट का मूल्य 20 अरब डॉलर से अधिक हो गया है.

कंपनी के बयान में कहा गया, ‘भारत अब यूएई का सबसे बड़ा ग्राहक है और एडीएनओसी गैस की LNG रणनीति का एक बेहद अहम हिस्सा है.’

यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. यूएई के साथ आई सरकारी प्रतिनिधिमंडल में यूएई के रक्षा और विदेश मंत्री भी शामिल थे. भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पत्रकारों को बताया कि दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी की दिशा में काम करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं.सऊदी-यूएई के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता से बनते नए समीकरण को लेकर बोस्टन (अमेरिकी शहर) के नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ मैक्स अब्राहम्स ने एक्स पर लिखा, ‘पाकिस्तान-तुर्की-सऊदी अरब के गठबंधन को टक्कर देने के लिए भारत-इजरायल-यूएई को अपना गठबंधन मजबूत करना चाहिए.’

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