पूर्व नक्सली कान्हू मुंडा 9 साल 7 माह बाद जेल से रिहा, राजनीति में आने की कही बात

गुड़ाबांदा : 15 फरवरी 2017 को अपने सात साथियों के साथ हथियार समेत सरेंडर करने वाले पूर्व नक्सली कान्हू मुंडा 9 साल 7 माह बाद जेल से रिहा हो गये। शुक्रवार को पुलिस सुरक्षा में वह गुड़ाबांदा के जियान गांव स्थित बनगोड़ा टोला अपने घर पहुंचे। पत्नी वैशाखी मुंडा, बच्चों और माता-पिता ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। कान्हू मुंडा सीपीआइ माओवादी के जोनल सचिव रह चुके हैं और उन्होंने तत्कालीन पूर्वी सिंहभूम एसएसपी अनूप टी मैथ्यू के समक्ष सरेंडर किया था।


कान्हू मुंडा के अनुसार, उन पर पहले 72 मामले दर्ज थे। पुलिस के पुन: अनुसंधान के बाद कई मामलों से उनका नाम हटाया गया और 35 मामले बचे। उन्होंने बताया कि इन मामलों में विभिन्न न्यायालयों से साक्ष्य के अभाव में वह बरी हो गये। मुसाबनी में नागरिक सुरक्षा समिति के अध्यक्ष रहे धनाई किस्कू की हत्या और बंगाल के पुरूलिया के एक हत्या मामले में उन्हें जमानत मिली है।
जेल से निकलने के बाद कान्हू मुंडा ने कहा कि अब बुलेट नहीं, बैलेट से व्यवस्था परिवर्तन संभव है और वह राजनीति में आएंगे। उन्होंने जंगल और पहाड़ों में अब भी हथियार लेकर घूम रहे नक्सलियों से मुख्यधारा में जुड़ने, चुनाव में आने और राजनीति के जरिए व्यवस्था परिवर्तन में भागीदारी करने की अपील की।


