झारखंड में एनआरसी की मांग तेज, बाबूलाल मरांडी ने घुसपैठ पर जताई गंभीर चिंता

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जमशेदपुर : झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में बढ़ती कथित घुसपैठ को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। जमशेदपुर के सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर हो रही घुसपैठ के कारण राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव आया है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव आदिवासी समाज पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि नागरिकता की स्थिति स्पष्ट नहीं होती है तो वे केंद्र सरकार से झारखंड में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की मांग करेंगे।

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मरांडी ने आदिवासी आबादी में आई गिरावट का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1951 में राज्य में आदिवासियों की जनसंख्या 35.38 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2011 की जनगणना में घटकर 26.20 प्रतिशत रह गई। उन्होंने आशंका जताई कि आगामी जनगणना के आंकड़े और अधिक चिंताजनक हो सकते हैं। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेशी घुसपैठिए झारखंड में प्रवेश कर रहे हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में फैल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए एनआरसी एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है।

नेता प्रतिपक्ष ने हेमंत सोरेन सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार, अपराध और लूट की घटनाएं बढ़ी हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर नागरिकता और एनआरसी के मुद्दे पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाया। इससे पहले सर्किट हाउस पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। बाबूलाल मरांडी सोमवार को घाटशिला में आयोजित भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रम में शामिल होंगे।

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