खुंटाडीह जमीन विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश
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जमशेदपुर : खुंटाडीह जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश देते हुए मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा है। अदालत के इस आदेश के बाद विवादित जमीन पर फिलहाल किसी भी तरह की नई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। यह मामला जमीन के अधिकार और कब्जे को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है।
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सुप्रीम कोर्ट में टाटा स्टील की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी और नीरज किशन कौल ने दलील दी कि खुंटाडीह की इस जमीन का इतिहास साल 1912 से जुड़ा है।
तब टाटा टाउनशिप की स्थापना के लिए इस भूमि का विधिवत अधिग्रहण किया गया था। कंपनी के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1944 में किराएदारी कानून की धारा 50 के तहत मुआवजा देकर काश्तकारी अधिकारों को समाप्त कर दिया गया था और कंपनी ने पुन: कब्जा प्राप्त कर लिया था।
टाटा स्टील का तर्क: जब पूर्व के किराएदारों की याचिकाएं और पुनर्विचार याचिकाएं देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) से पहले ही खारिज हो चुकी हैं, तो अब राजस्व अभिलेखों (रेवेन्यू रिकार्ड) में सुधार के बहाने नए सिरे से विवाद खड़ा करना कानूनन पूरी तरह गलत है।
दरअसल, टाटा स्टील ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें राजस्व रिकार्ड में सुधार के लिए धारा 90 के तहत शुरू की गई कार्यवाही को अनुमति दी गई थी।
कंपनी का मानना है कि यह उन मुद्दों को फिर से खोलने की कोशिश है जो पहले ही न्यायिक रूप से तय हो चुके हैं। शीर्ष अदालत ने टाटा स्टील की इन दलीलों को विचारणीय मानते हुए फिलहाल जमीन की स्थिति को ‘जस का तस’ बनाए रखने का निर्देश दिया है।


