बांग्लादेश चुनाव: जमात-ए-इस्लामी के कट्टरपंथी गठबंधन में सीटों का बंटवारा,


बांग्लादेश: बांग्लादेश की राजनीति में 13वें राष्ट्रीय संसद चुनाव को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय चुनावी गठबंधन ने 300 संसदीय सीटों में से 253 सीटों पर आपसी सहमति बना ली है. गुरुवार, 15 जनवरी की रात राजधानी ढाका के काकराइल स्थित डिप्लोमा इंजीनियर्स संस्थान में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इस चुनावी गठबंधन की सीट शेयरिंग का एलान किया गया. बता दें कि बांग्लादेश में आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को होने जा रहा है. यह चुनाव शेख हसीना के सत्ता से हटने और अंतरिम सरकार के गठन के बाद का पहला चुनाव है. इस चुनाव को लोकतांत्रिक स्थिरता की बहाली के लिए अहम माना जा रहा है, हालांकि इसकी निष्पक्षता को लेकर बड़े सवाल हैं. शेख हसीना की अवामी लीग को बैन कर दिया गया है.गठबंधन के तहत जमात-ए-इस्लामी ने सबसे ज्यादा 179 सीटों पर दावेदारी ठोककर अपनी मजबूती दिखाई है. नाहिद इस्लाम, जो कभी शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन के प्रमुख समन्वयक थे, उनकी पार्टी एनसीपी को 30 सीटों से संतोष करना पड़ा है. गठबंधन ने कहा है कि हर सीट पर केवल एक ही साझा उम्मीदवार होगा, जिससे वोट बैंक का बिखराव न हो.जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन की चर्चा शुरू होते ही नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के अंदर असंतोष के सुर फूट पड़े. पार्टी के 13 से ज्यादा केंद्रीय नेताओं ने वैचारिक मतभेदों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है. तसनीम जारा जैसी युवा नेताओं ने गठबंधन का विरोध करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है. उनका तर्क है कि जिस कट्टरपंथ के खिलाफ छात्र लड़े थे, अब उसी के साथ समझौता करना आंदोलन के मूल्यों के खिलाफ है.यह गठबंधन बांग्लादेश के चुनावी इतिहास के सबसे बड़े इस्लामिक गठजोड़ के रूप में देखा जा रहा है. इसमें छोटी-बड़ी 11 पार्टियों को एक मंच पर लाया गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग की अनुपस्थिति और बीएनपी (BNP) की सक्रियता के बीच यह तीसरा मोर्चा चुनाव परिणामों को गहराई से प्रभावित कर सकता है. गठबंधन का मुख्य फोकस युवा मतदाताओं और धार्मिक रूप से कट्टरपंथी तबके को साथ लाना है.




