जलकुंभी से तैयार हुई ईको-फ्रेंडली साड़ी, गौरव आनंद की पहल से महिलाओं को भी रोजगार

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जमशेदपुर : तालाब और नदी से निकालकर कचरे के रूप में फेंकी जाने वाली जलकुंभी अब साड़ी और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने का जरिया बन रही है। गौरव आनंद ने जलकुंभी की इस संभावना को पहचानकर कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी और इसे फाइबर में बदलने का प्रयोग शुरू किया। उन्होंने अपनी संस्था स्वच्छता पुकारे फाउंडेशन के माध्यम से इस दिशा में काम किया और लगातार प्रयास के बाद फरवरी 2022 में जलकुंभी से साड़ी तैयार करने में सफलता हासिल की।

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गौरव आनंद पहले टाटा ग्रुप में कॉर्पोरेट नौकरी करते थे। पर्यावरण और रोजगार से जुड़े काम को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने जलकुंभी से फाइबर निकालने पर प्रयोग किया। जलस्रोतों से जलकुंभी निकालने के बाद उससे फाइबर तैयार किया जाता है और फिर इसे कपास के साथ मिलाकर कपड़ा बनाया जाता है। इसी कपड़े से साड़ी समेत दूसरे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। गौरव आनंद के मुताबिक, लगातार प्रयोग के बाद जलकुंभी से बनने वाले कपड़े को मुलायम और बेहतर गुणवत्ता वाला बनाने में भी सफलता मिली है।

इस पहल के साथ महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी जुड़े हैं। महिलाओं को फाइबर, कपड़ा और अन्य उत्पाद तैयार करने के विभिन्न चरणों में काम मिलने की बात कही गई है। अब जलकुंभी से फाइबर और कपड़ा बनाने की इस तकनीक को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर जलकुंभी को संसाधन में बदलने के साथ रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकें।

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