3.29 करोड़ की आबादी, राशन का कोटा सिर्फ 2.64 करोड़; लाखों जरूरतमंदों पर संकट






धनबाद : झारखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभुकों की निर्धारित सीमा आबादी के मुकाबले कम होने का मुद्दा सामने आया है। राज्य की वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी करीब 3.29 करोड़ थी, जबकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लगभग 2.64 करोड़ लोगों को ही शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। निर्धारित कोटा लगभग पूरा हो जाने के कारण नए पात्र परिवारों को राशन कार्ड से जोड़ने में परेशानी आ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 2.64 करोड़ लाभुक एनएफएसए के तहत पहले से राशन प्राप्त कर रहे हैं।


समस्या यह है कि यह सीमा वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर तय की गई थी, जबकि बीते वर्षों में राज्य की आबादी बढ़ चुकी है। ऐसे में कई पात्र परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे से बाहर रह सकते हैं। राज्य सरकार ने अलग से झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत ग्रीन राशन कार्ड की व्यवस्था की है, जिसके माध्यम से करीब 20.29 लाख लाभुकों को जोड़ा गया है। इसके बावजूद बढ़ती आबादी और नए जरूरतमंद परिवारों के कारण राशन कार्ड की मांग बनी हुई है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत झारखंड के लिए निर्धारित लाभुक सीमा में वृद्धि नहीं होने से नए आवेदन करने वाले जरूरतमंद परिवारों के सामने परेशानी बनी हुई है। इस स्थिति में जनसंख्या के मौजूदा आंकड़ों के अनुरूप खाद्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की जरूरत पर सवाल उठ रहे हैं, ताकि पात्र परिवार सरकारी अनाज योजना के लाभ से वंचित न रहें।


