राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली 2020 के विषय में सेमिनार का आयोजन


सरायकेला (संजीव मेहता) : मॉडल महाविद्यालय सरायकेला खरसवाँ परिसर में प्राचार्य डॉ. विनय कुमार सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली 2020 के विषय में सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ रणजीत प्रसाद, सिंडिकेट सदस्य, कोल्हान यूनिवर्सिटी, चाईबासा सह पूर्व विभागाध्यक्ष, मेटलर्जी विभाग, NIT, जमशेदपुर एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री सोनू ठाकुर, सिंडिकेट सदस्य, कोल्हान यूनिवर्सिटी, चाईबासा उपस्थित रहे.
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सोनू ठाकुर ने अपने उद्बोधन में भारत की सनातन एवं गौरवशाली पुरातन शिक्षा पद्धति पर गहराई से प्रकाश डाला. उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि भारत की प्राचीन गुरुकुल प्रणाली केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह विद्यार्थियों के बौद्धिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का केंद्र थी, जहाँ निःशुल्क और जीवनोपयोगी व्यावहारिक शिक्षा दी जाती थी. इसके बाद, उन्होंने अत्यंत मार्मिक ढंग से इस महान व्यवस्था के पतन और उसके पीछे की सोची-समझी नीति को रेखांकित किया. श्री ठाकुर ने विस्तार से बताया कि कैसे ब्रिटिश काल में लॉर्ड मैकाले की आधुनिक शिक्षा नीति ने भारतीय समाज की रीढ़ पर प्रहार किया. मैकाले का मुख्य उद्देश्य भारत को वैचारिक रूप से गुलाम बनाना था, जिसके तहत उसने पारंपरिक गुरुकुलों को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट कर उनके स्थान पर एक ऐसी औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली को स्थापित किया, जो केवल क्लर्क पैदा कर सके. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रतिस्थापन ने भारतीयों को अपनी ही समृद्ध संस्कृति, भाषा और जड़ों से दूर कर दिया. अंत में उन्होंने आज के परिप्रेक्ष्य में मैकाले के इस मानसिक प्रभाव से मुक्त होकर अपनी पुरातन पद्धति के श्रेष्ठ मूल्यों को पुनः अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया. मुख्य वक्ता के रूप में डॉ रणजीत प्रसाद द्वारा “NEP 2020 : विद्यार्थियों का सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास” विषय पर व्याख्यान दिया गया. उन्होंने अपने वक्तव्य की शुरुआत ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से करते हुए, पूर्ववर्ती राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968 और 1986 की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ-साथ समकालीन समय में उनकी व्यावहारिक कमियों और सीमाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला. इसके उपरांत, उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विभिन्न क्रांतिकारी पहलुओं का गहन विश्लेषण किया. डॉ. प्रसाद ने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस नई नीति का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना या उन्हें पारंपरिक रटंत विद्या का हिस्सा बनाना नहीं है, बल्कि उनके मानसिक, व्यावहारिक और सर्वांगीण व्यक्तित्व को निखारना है. उन्होंने रेखांकित किया कि NEP 2020 के तहत छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विषयों के चुनाव की जो अभूतपूर्व स्वतंत्रता मिली है, वह उनके भीतर छिपी प्रतिभा को उजागर करने और समग्र विकास के मार्ग को प्रशस्त करने में मील का पत्थर साबित होगी. वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने छात्र-छात्राओं को रोजगारपरक और कौशल-आधारित शिक्षा अपनाने के लिए दृढ़ता से प्रेरित किया. कार्यशाला के अंतिम चरण में, विद्यार्थियों ने नई शिक्षा नीति की बारीकियों और अपने नियमित पठन-पाठन से जुड़ी कई व्यावहारिक जिज्ञासाओं और कठिनाइयों को खुलकर साझा किया. उपस्थित विषय विशेषज्ञों ने बड़ी ही आत्मीयता से उन सभी जटिल प्रश्नों का बेहद सरल, सुस्पष्ट और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर छात्रों का मार्गदर्शन किया.
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय कुमार सिंह ने आश्वस्त करते हुए कहा कि हमारा संस्थान छात्रों की हर शैक्षणिक व व्यावहारिक समस्या के त्वरित समाधान और उनके स्वर्णिम भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने विशेष बल देते हुए रेखांकित किया कि नई शिक्षा नीति (NEP) के आलोक में पठन-पाठन की प्रक्रिया को और अधिक सुलभ, व्यावहारिक तथा रोजगारपरक बनाने के लिए कॉलेज पूरी तरह प्रतिबद्ध है. संस्थान का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक कौशल से लैस कर आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे आगामी वैश्विक चुनौतियों का दृढ़ता से सामना कर सकें. व्याख्यान के सफल समापन पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय कुमार सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मुख्य वक्ता डॉ रणजीत प्रसाद जी एवं विशिष्ट अतिथि सोनू ठाकुर जी का हृदय से आभार व्यक्त किया. साथ ही उन्होंने कहा की यह ज्ञानवर्धक सत्र हमारे छात्रों और प्राध्यापकों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, साथ ही कार्यशाला के आयोजन मंडल, सम्मानित सहयोगियों और प्रिय छात्र-छात्राओं को उनकी सक्रिय भागीदारी व अनुशासन के लिए धन्यवाद दिया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान के साथ सम्पन्न हु.



