राष्ट्रवाद के बड़े-बड़े भाषण देने वाले लोग भाजपाई बताएं देश पहले है या विदेशी स्वीकृति? : जेएमएम


Saraikela : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच दुनियाभर में तेल की आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिसे देखते हुए अमेरिका ने गुरुवार को भारतीय तेलशोधक कंपनियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट देने की घोषणा कर दी. इस घटनाक्रम को जहां भाजपा ने अपनी ‘रणनीतिक तेल कूटनीति’ की जीत बताया है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने इस खबर को अमेरिकी ब्लैकमेल बताते हुए संप्रभु भारत का अपमान बताया है. इसी कड़ी में शुक्रवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधा और केंद्र पर तंज कसते हुए इस कदम को मास्टरस्ट्रोक बताया साथ ही पूछा कि, हमारे देश की राजधानी वॉशिंगटन कब हो गई ?’ भारत को छूट देने की जानकारी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी. इसी पोस्ट को JMM ने भी शेयर किया और इसके जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा, ‘हिंदी में इसका साफ़ मतलब है- अमेरिका जैसा कहे, वैसा ही हम करते जाएं. यानी राष्ट्रीय नीति नहीं, बल्कि विदेशी इशारों पर चलने वाली राजनीति.’ अपनी पोस्ट में जेएमएम ने लिखा, ‘केंद्र सरकार से तो अब किसी स्वतंत्र रुख की उम्मीद ही नहीं बची, लेकिन कम से कम हमारे “पत्रवीर” बाबूलाल मरांडी जी इस मुद्दे पर एक कड़ा पत्र लिखने का साहस तो दिखा सकते हैं. या फिर वही पुराना जज़्बा दिखाइए और क़ुतुब मीनार से कूदने वाला बयान ही वापस ले लीजिए.’ अपनी पोस्ट में आगे भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए JMM ने लिखा, ‘भाजपा के नेताओं को कम से कम इतना तो साबित करना चाहिए कि उनकी रीढ़ की हड्डी अभी पूरी तरह गायब नहीं हुई है. हर राष्ट्रीय मुद्दे पर चुप्पी साध लेना और विदेशी ताकतों के आगे झुक जाना राष्ट्रवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक अवसरवाद है.’ झामुमो ने आगे लिखा, ‘आजादी के समय अंग्रेजों के साथ खड़े रहने की विरासत से आगे बढ़कर अब देश की प्रतिष्ठा और संप्रभुता को अमेरिकी इशारों पर गिरवी रखने की नई राजनीति चल रही है. राष्ट्रवाद के बड़े-बड़े भाषण देने वाले लोग आज बताएं देश पहले है या विदेशी स्वीकृति?’ भारत को दी गई इस छूट की जानकारी देते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने लिखा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप के एनर्जी एजेंडा की वजह से तेल और गैस का प्रोडक्शन अब तक के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया है. वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति जारी रखने के लिए, वित्त विभाग भारतीय तेल रिफाइनरियों को 30 दिन के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे रहा है.




