शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दुखी मन से छोड़ा माघ मेला,


प्रयागराज : प्रयागराज में चल रहे माघ मेला से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दुखी मन से विदा लेने का ऐलान किया है। बुधवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वह आस्था और श्रद्धा के साथ माघ मेला में आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि बिना स्नान किए ही लौटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज हमेशा से शांति, विश्वास और सनातन परंपराओं की भूमि रही है और यहां से इस तरह लौटना,बेहद पीड़ादायक है।शंकराचार्य ने यह भी कहा कि माघ मेला छोड़ने का फैसला अचानक नहीं लिया है। यह फैसला 11 दिन के बाद लिया गया है। इतना लंबा समय तो श्रीराम ने समुंद्र से रास्ता मांगते समय भी नहीं लिया था। तीन दिन बाद ही भगवान श्रीराम को भी कोप हो गया था। हम तो 11 दिन से यहीं पर हैं। 11 दिन में बहुत सी बैठकें हो सकती थीं। बहुत सारे विचार हो सकते थे। जब 11 दिन बाद भी निर्णय नहीं लिया गया तो हमने फैसला किया कि इसे अंतिम रूप देने के लिए निर्णायक संकल्प करेंगे। 11 दिन बैठकर हमने न्याय की प्रतीक्षा की है।मीडिया के सामने बोलते-बोलते गला भर जाने के कारण शंकराचार्य कुछ देर रुक भी गए और कहा कि हम कुछ देर चुप रहेंगे। इसके बाद आपके एक-एक सवाल का जवाब देंगे। शंकराचार्य ने कहा कि हमने अन्याय का विरोध किया है और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कहा कि यहां से भारी मन लेकर लौटना पड़ रहा है। इसकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी। यहां हमारे लोगों के साथ जो कुछ हुआ है उसने न सिर्फ हमारी आत्मा को झकझोर है, बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे विश्वास पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। संगम की इन लहरों में स्नान करना केवल धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि आत्मा की संतुष्टि का एक मार्ग भी है।शंकराचार्य ने कहा कि एक तरफ गृहमंत्री अमित शाह कल गांधीनगर में थे। उन्होंने वहां कहा कि संतों का अपमान करने वाली और सनातनियों की सुध नहीं लेने वाली सरकारें कभी भी स्थाई नहीं रह सकती हैं। एक तरफ उनके द्वारा इतना बड़ा ज्ञान दिया जा रहा है। दूसरी तरफ सनातन के सबसे बड़े प्रतीक शंकराचार्य, बटुक और सन्यासियों और ब्रह्मचारियों का अपमान हो रहा है।




