रांची में जब्त 635 किलो डोडा चूहों ने खा लिया, पुलिस की लापरवाही से दो आरोपी बरी

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रांची : नामकुम थाना इलाके में शराब/डोडा जब्ती मामले में पुलिस की कथित लापरवाही ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। नामकुम थाना में कुल 836 किलो डोडा जब्त किया गया था, लेकिन उसमें से करीब 635 किलो डोडा चूहों द्वारा खा लिया गया। इस अनोखी स्थिति के कारण एफएसएल (Forensic Science Laboratory) रिपोर्ट भी प्रभावित हुई और दो आरोपियों को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया।

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मामले की शुरुआत लगभग 6 साल पहले, 31 मई 2019 को हुई थी जब कोलाड गांव के पास डोडा तस्करी की सूचना पर पुलिस ने दो आरोपियों कार्तिक महतो और चूरू लोहरा को गिरफ्तार किया था। उनके वाहन से पुलिस ने 45 बोरी में पैक कुल 836 किलो डोडा जब्त करने का दावा किया था।

जब पुलिस ने ये सबूत कोर्ट में पेश करने की कोशिश की, तो दस्तावेजों और भंडारित डोडा की स्थिति पर सवाल उठे। एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार चूहों ने चार डब्बों को कुतरा दिया था और केवल एक डब्बा सील हालत में बच पाया था। पुलिस ने बताया कि चूहों ने मादक पदार्थ को नष्ट कर दिया था, लेकिन सीलिंग और पहचान के अभाव के कारण यह साबित नहीं हो सका कि यह वही डोडा है जिसे पहले जब्त किया गया था।

कोर्ट ने भी यह नोट किया कि पुलिस ने डोडा को कभी सही तरीके से सील या निशानित नहीं किया था, जिससे सबूतों की विश्वसनीयता कम हो गई। पुलिस रिपोर्ट में भिन्न-भिन्न बोरियों और वजन की जानकारी दी गई थी, जिससे न्यायालय में सबूत पेश करने में समस्या आई।

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इन procedural कमियों के चलते कार्तिक महतो और चूरू लोहरा को साक्ष्य की कमी के कारण बरी कर दिया गया। पुलिस अब मामले की जाँच जारी रखे हुए है और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों या अधिकारियों के खिलाफ आन्तरिक जांच और कार्रवाई की बात कही गई है।

इस घटना ने न केवल पुलिस के सबूत प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी दिखाया कि मलखाने/स्टोरेज जैसी सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन न होने से गंभीर मामलों में भी आरोपियों को छुट मिल सकती है।

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