इंदौर के बाद अब रतलाम में भी गंदे पानी का संकट,


मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है. इसी बीच रतलाम से भी बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. रतलाम नगर निगम क्षेत्र में गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई को लेकर पार्षदों और स्थानीय लोगों ने मोर्चा खोल दिया है. आरोप है कि शहर की करीब 40 फीसदी आबादी लंबे समय से दूषित पेयजल पीने को मजबूर है.वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद सलीम बागवान का कहना है कि उनके वार्ड सहित आसपास के इलाकों में नलों से गंदा, बदबूदार और कीड़ों से भरा पानी आ रहा है. लोगों ने कई बार नगर निगम, जनसुनवाई और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत की, लेकिन हालात जस के तस बने रहे.परेशान नागरिक जब गंदे पानी से भरी बोतलें लेकर अधिकारियों के पास पहुंचे, तब भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इससे लोगों में नाराजगी और डर दोनों बढ़ता गया.मामला गंभीर होता देख पार्षद सलीम बागवान ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का दरवाजा खटखटाया. पार्षद का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी को गलत जानकारी देकर गुमराह करने की कोशिश की.स्थानीय लोगों और पार्षद के मुताबिक समस्या की जड़ शहर का जर्जर सीवरेज सिस्टम और खस्ताहाल पेयजल पाइपलाइन है. कई जगह सीवरेज और पानी की लाइनें साथ-साथ डली हुई हैं. लीकेज होते ही गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल जाता है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है.पार्षद सलीम बागवान ने साफ कहा है कि वह इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे. जरूरत पड़ी तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे. उनका कहना है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों को छोड़ा नहीं जाएगा.मामले की गंभीरता को देखते हुए रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह, नगर निगम आयुक्त अनिल भाना, एसडीएम और अन्य अधिकारी मोरवनी फिल्टर प्लांट पहुंचे और हालात का निरीक्षण किया. इसके बाद टीम ने खेतलपुर और चांदनी चौक क्षेत्र में पहुंचकर सीवरेज लीकेज सुधार कार्य का जायजा लिया.




