श्रीनाथ विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में ही राज्यपाल के सम्मान में खड़े होने की परंपरा टूटी,  प्रोटोकॉल का उल्लंघन बना चर्चा का विषय…

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जमशेदपुर:- श्रीनाथ विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में सबसे बड़ा और गंभीर मुद्दा शिष्टाचार व प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर सामने आया है। समारोह के दौरान जब राज्यपाल स्वयं खड़े होकर विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कर रहे थे, उसी समय मंच पर मौजूद एक ट्रस्टी का कुर्सी पर बैठे रहना विवाद का केंद्र बन गया है। इसे लेकर शिक्षा जगत और प्रशासनिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।

संवैधानिक और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के अनुसार राज्यपाल राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन होते हैं। जब वे मंच पर खड़े होकर किसी आधिकारिक दायित्व का निर्वहन करते हैं, तो उनके सम्मान में मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों का खड़ा रहना आवश्यक माना जाता है। विशेषकर ट्रस्टी या विश्वविद्यालय प्रबंधन से जुड़े लोगों का उस समय बैठे रहना न केवल अनुचित है, बल्कि इसे पदानुक्रम और गरिमा की अनदेखी के रूप में देखा जा रहा है।

जानकारों का कहना है कि दीक्षांत समारोह जैसे अकादमिक आयोजनों में मर्यादा, अनुशासन और प्रोटोकॉल का विशेष महत्व होता है। ऐसे में पहले ही कन्वोकेशन में इस तरह की चूक विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीरता और आयोजन की तैयारी पर सवाल खड़े करती है। यह केवल एक व्यक्ति के व्यवहार का मामला नहीं, बल्कि संस्थान की छवि और शैक्षणिक संस्कारों से जुड़ा विषय है।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है, लेकिन समारोह में मौजूद कई लोगों ने इसे स्पष्ट रूप से प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया है। इस बात की दबे जुबान छात्र भी चर्चा करने लगे है कि जब राज्यपाल खड़े हों और अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हों, तब मंच पर किसी का कुर्सी पर बैठे रहना शिष्टाचार और संवैधानिक सम्मान—दोनों के विपरीत है। यही कारण है कि यह मामला अब विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह पर एक गंभीर सवालिया निशान बनकर उभर आया है।

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