54 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई खरसावां–रडगांव सड़क महज़ चार वर्षों में ही जर्जर, उपयोग लायक नहों

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Saraikela : 54 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई खरसावां–रडगांव सड़क महज़ चार वर्षों में ही जर्जर हो चुकी है. यह सड़क उपयोग लायक नहीं बची है. एनएच-33 से खरसावां को जोड़ने वाले इस करीब 30 किलोमीटर लंबे मार्ग पर जगह-जगह पिच उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं. सड़क पर बिखरे हुए गिट्टी के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं. हल्का ब्रेक लगाते ही बाइक व स्कूटी फिसल जा रही है, जिससे सड़क पर आवागमन काफी जोखिमभरा हो गया है. रायजामा घाटी के पास बनी गहरी खाई जैसे गड्ढे में अक्सर वाहन फंस जाते हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति बन जाती है. रांची, बुंडू, तमाड़ आदि क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह सड़क अब परेशानी का सबब बन चुकी है.

* आठ साल में बना था सड़क, चार साल में खराब-

यह सड़क पहले आरईओ विभाग के अधीन थी. वर्ष 2012-13 में इसे पीडब्ल्यूडी में स्थानांतरित किया गया और 54 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ीकरण व जीर्णोद्धार कार्य को मंजूरी मिली. 2014 में निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसे पूरा होने में पूरे आठ वर्ष लग गए. वर्ष 2021-22 में सड़क का उद्घाटन किया गया, लेकिन गुणवत्ता की कमी और ओवरलोड वाहनों के परिचालन के कारण सड़क मात्र चार साल में ही ध्वस्त हो गई.

* उड़ती धूल से लोग बेहाल, 50 किमी घूमकर रांची जाना मजबूरी-

सड़क टूटने के कारण उस पर लगातार धूल उड़ रही है. सड़क किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों का जीना दूभर हो गया है. धूल के कारण सांस लेने में कठिनाई हो रही है और घरों में भी मिट्टी की परत जम रही है.
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग इस मार्ग का उपयोग छोड़कर सरायकेला–कांड्रा–चौका होकर रांची जाने लगे हैं. इससे उन्हें करीब 50 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है.

* विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा-

खरसावां के विधायक दशरथ गागराई ने गुरुवार को विधानसभा के शून्यकाल में इस जर्जर सड़क की समस्या को जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने कहा कि खरसावां–रडगांव मार्ग की स्थिति बेहद दयनीय है, पिच पूरी तरह उखड़ चुकी है और जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं. इसके कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
उन्होंने सरकार से तत्काल राइडिंग क्वालिटी में सुधार एवं सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है.

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