ऑफिस के बाद बॉस का फोन न उठाने का हक मिलेगा,

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दिल्ली: :संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में शुक्रवार, 5 दिसंबर को एक प्राइवेट मेंबर बिल (PMB) पेश किया गया। इस विधेयक का नाम ‘राइट टू डिसकनेक्ट बिल 2025 (Right to Disconnect Bill 2025)’ है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को ऑफिस टाइम के बाहर काम से जुड़े फोन कॉल और ईमेल का जवाब देने से छूट देना है।NCP की सांसद सुप्रिया सुले ने इस प्राइवेट मेंबर बिल को पेश किया। प्राइवेट मेंबर बिल को किसी सांसद (MP) द्वारा संसद में पेश किया जाता है। ये किसी मंत्री द्वारा पेश नहीं किया जाता। इंडियन पार्लियामेंट सिस्टम में किसी सांसद को ‘प्राइवेट मेंबर’ तब माना जाता है जब वह किसी मंत्री पद पर न हो, चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का।
आजादी के बाद से अब तक केवल 14 प्राइवेट मेंबर बिल दोनों सदनों में पारित होकर राष्ट्रपति की स्वीकृति हासिल कर पाए हैं। वहीं, साल 1970 के बाद से कोई भी PMB दोनों सदनों में पारित नहीं हुआ है।एक तरफ तो देश में 70 घंटे काम करने को लेकर बहस चल रही है. कुछ लोग इसके पक्ष में हैं तो वहीं GenZ वर्ग इसके खिलाफ है. इस डिबेट में वो ‘पर्सनल लाइफ, मी टाइम, वर्क लाइफ बैलेंस’ जैसे तर्कों का इस्तेमाल करता है. इन सब के बीच लोकसभा में एक बिल पेश हुआ है जो ऑफिस के बाद या छुट्टी के दिन बॉस का फोन ना उठाने और काम से संबंधित किसी मेल का जवाब ना देने के अधिकार की पैरवी करता है. बिल के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी तरह की अवहेलना (नॉन-कम्प्लायंस) की स्थिति में संबंधित संस्था (कंपनी या सोसायटी) पर उसके कर्मचारियों के कुल पारिश्रमिक (टोटल रेम्यूनरेशन) का 1 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा. बिल हर कर्मचारी को काम से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन- जैसे कॉल, ईमेल और मैसेज- से दूर रहने का अधिकार देता है.एक अन्य प्राइवेट मेंबर बिल, ‘मेनस्ट्रुअल बेनिफिट्स बिल, 2024’ कांग्रेस सांसद कडियम काव्या की ओर से पेश किया गया, जिसमें महिलाओं को मेंसुरेशन के दौरान वर्कप्लेस पर सुविधाएं और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने का प्रावधान है.लोजपा सांसद शंभवी चौधरी ने भी एक प्रस्तावित कानून पेश किया, जिसमें कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए पेड पीरियड लीव, मेंसुरेशन से जुड़ी हाइजीन सुविधाएं और अन्य स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल है.

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