SIR ड्यूटी में लगे रोजगार सहायक अधिकारी ने जान दी

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मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश के कटनी जिले में SIR ड्यूटी में लगे रोजगार सहायक ने आत्महत्या की खबर सामने आई है. परिजन ने बताया कि मृतक रोजगार सहायक की पेमेंट 3 माह से रुकी हुई थी. उन्होंने काम के दबाव में आकर फांसी लगा लगी.
दरअसल, पूरा मामला ढीमरखेड़ा थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत गोपालपुर के सुंतरा गांव का बताया जा रहा है, जहां एक रोजगार सहायक ने पेड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान रूपेंद्र सिंह के रूप में हुई है जो गोपालपुर ग्राम पंचायत में कार्यरत थे. उनके पिता ने बताया कि रूपेंद्र पिछले कई दिनों से बहुत परेशान था. उसे तीन महीने से मानदेय नहीं मिला था. ऊपर से एसआईआर (SIR) काम को लेकर भी भारी दबाव था. इसी आर्थिक तंगी और काम के बोझ के चलते रूपेंद्र ने यह आत्मघाती कदम उठा लिया है. उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि मृतक कल दोपहर से घर से लापता था, जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज है. वहीं, देर शाम रोजगार सहायक रूपेंद्र के फांसी लगाने की सूचना पर पुलिस ने तत्काल मौके पर जाकर शव कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया. रिपोर्ट और जांच के तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.लेकिन इसी बीच राज्य में बीएलओ की लगातार हो रही मौतों ने व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है. इससे पहले छह बीएलओ अपनी ड्यूटी के दौरान दम तोड़ चुके हैं. शहडोल के सोहागपुर में बीएलओ मनीराम नापित मतदाता फॉर्म संग्रह के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से चल बसे. नर्मदापुरम के पिपरिया में शिक्षक और बीएलओ सुजान सिंह रघुवंशी सर्वे से लौटते समय ट्रेन हादसे का शिकार हुए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई. मंडीदीप में ऑनलाइन बैठक के तुरंत बाद बीएलओ रमाकांत पांडे बेहोश हुए और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई.झाबुआ में बीएलओ भुवन सिंह को हाल ही में लापरवाही में निलंबित किया गया था, जिसके बाद सदमे और तनाव के कारण उन्हें हार्ट अटैक आया और मौत हो गई. दमोह और बालाघाट जिलों में भी दो बीएलओ लगातार दबाव और भागदौड़ के कारण बीमार पड़े और इलाज के दौरान चल बसे. राजधानी भोपाल में भी दो बीएलओ कीर्ति कौशल और मोहम्मद लईक ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक का शिकार हुए और फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं. रीवा, भिंड सहित कई जिलों से हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मामलों की रिपोर्टें सामने आ रही हैं. कर्मचारियों का आरोप है कि बीमारी तथा थकान के बावजूद भी उनसे काम पूरा करने का दबाव डाला जा रहा है.परिजन आरोप लगा रहे हैं कि यदि समय पर वेतन मिल जाता और उस पर कार्य का इतना दबाव न होता, तो शायद रूपेंद्र आज जीवित होते. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए क्योंकि कई बार उन्हें बिना संसाधन, बिना स्टाफ और बिना समय सीमा बढ़ाए अत्यधिक काम सौंप दिया जाता है. एएसपी ने बताया कि मृतक रूपेंद्र पिछले तीन दिनों से घर से गायब था. उन्होंने कहा कि प्राथमिक जानकारी में उसकी शराब के सेवन की लत की बात सामने आई है. पुलिस के पास वेतन न मिलने या काम के ज्यादा बोझ को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं थी.
फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है ताकि आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके. घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी दिखाई दे रही है और पुलिस की जांच जारी है. परिवार और ग्रामीण प्रशासन से न्याय की मांग कर रहे हैं. आने वाली जांच रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि रूपेंद्र की मौत के पीछे असल वजह क्या थी, लेकिन यह घटना एक बार फिर बताती है कि जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों पर बढ़ता दबाव किस हद तक घातक होता जा रहा है.

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