भारतीय महिला का उत्पीड़न: पीड़िता का आरोप- चीनी एयरपोर्ट पर अफसरों ने कहा- अरुणाचल भारत का नहीं


अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश की निवासी प्रेमा वांगजोम थोंगडोक ने दावा किया कि चीन के आव्रजन (इमिग्रेश) अधिकारियों ने भारतीय पासपोर्ट होने के चलते शंघाई पुडोंग हवाई अड्डे पर उनका उत्पीड़न किया। चीनी अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट को अमान्य बताया और उन्हें जापान जाने में देर कराई। थोंगडोक ने बताया, जब मैंने उनसे सवाल पूछने की कोशिश की और मुद्दा समझाना चाहा तो उन्होंने कहा, अरुणाचल भारत का हिस्सा नहीं है और मेरा मजाक उड़ाने लगे। वे हंसते हुए कह रहे थे – तुम्हें चीनी पासपोर्ट के लिए आवेदन करना चाहिए, तुम चीनी हो, भारतीय नहीं। महिला के अनुसार, इस दौरान उनसे कई कठोर सवाल पूछे गए और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया गया। इतना ही नहीं, अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया। इसके कारण वह जापान के लिए अपनी अगली उड़ान में सवार नहीं हो सकीं, जबकि उनके पास जापान का कानूनी और वैध वीज़ा मौजूद था। इस पूरी घटना की जानकारी पेमा वांग थोंगडोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व नाम ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को टैग करते हुए मदद की गुहार लगाई। पेमा ने अपने पोस्ट में लिखा कि चीन के इमिग्रेशन विभाग और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस की वजह से उन्हें 18 घंटे से ज्यादा एअरपोर्ट के अंदर हिरासत में रखा गया। अधिकारियों ने उनके जन्मस्थान को देखकर पासपोर्ट को अमान्य घोषित कर दिया और कहा कि वह भारतीय नागरिक नहीं हैं।यह घटना बेहद गंभीर है क्योंकि यह सीधे-सीधे चीन की उस नीति को दिखाती है, जिसके अनुसार वह अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताकर भारत के नागरिकों की पहचान पर सवाल उठाता है। भारत पहले भी कई बार चीन की इस मानसिकता का विरोध कर चुका है, लेकिन अब यह मामला एक भारतीय नागरिक के व्यक्तिगत अनुभव के रूप में सामने आया है। यह मामला न केवल चीन के रवैये पर सवाल खड़े करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों पर भी चिंता जताता है। फिलहाल यह घटना भारत में भी चर्चा का विषय बनी हुई है और यह देखना होगा कि सरकार इस मामले पर आगे क्या कदम उठाती है।




