जनजाति सांस्कृतिक समागम के विरोध पर बवाल, मंच ने विदेशी फंडिंग और समाज तोड़ने का लगाया आरोप

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जमशेदपुर : जनजाति सुरक्षा मंच ने 24 मई को दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित होने वाले जनजाति सांस्कृतिक समागम के विरोध पर नाराजगी जताई है। मंच ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित इस कार्यक्रम के खिलाफ कुछ संगठनों की बयानबाजी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मंच का कहना है कि यह आयोजन जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा और अस्मिता को प्रदर्शित करने वाला राष्ट्रीय महोत्सव है, जिसमें देशभर की 500 से अधिक जनजातियों के करीब 1.5 लाख लोग शामिल होने वाले हैं।

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मंच के कोल्हान प्रभारी सुरा बिरुली ने कहा कि 122 संगठनों के नाम पर केवल 22 लोग निजी स्वार्थ और विदेशी फंडिंग के दबाव में विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संगठनों का जनजातीय समाज से कोई संबंध नहीं है और उनका उद्देश्य समाज में भ्रम फैलाना और विभाजन करना है।

उन्होंने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच ऐसे राष्ट्रविरोधी और समाज विरोधी कृत्यों की कड़ी निंदा करता है। मंच ने दावा किया कि जनजातीय समाज अपनी संस्कृति, पूजा-पद्धति और परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट है। साथ ही देशभर के जनजातीय समाज से 24 मई को लाल किला मैदान पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की गई।

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