“टूट गया रिश्ता, मगर ना टूटी तहज़ीब… आमिर ने जुदाई को भी मोहब्बत बना दिया”

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लोक आलोक न्यूज डेस्क / लाइफ स्टाइल :-  आज के दौर में रिश्ते जितनी तेजी से बनते हैं, उससे भी ज्यादा तेजी से टूटते हैं, जहां एक क्लिक में प्यार शुरू और एक ब्लॉक में खत्म हो जाता है, वहां आमिर खान जैसे शख्स का यह कहना – “हम अलग हुए, दुश्मन बनकर नहीं, दोस्त बनकर” – एक ऐसा तमाचा है जो रिश्तों की दिखावटी चमक-दमक के पीछे छुपे खोखलेपन को बेनकाब करता है। रीना दत्ता से 16 साल का साथ और किरण राव के साथ 15 साल की शादी के बाद जब आमिर ने दोनों से तलाक लिया, तब उन्होंने वही किया जो आज की दुनिया में दुर्लभ है – उन्होंने रिश्तों को खत्म तो किया, लेकिन इज्जत, समझदारी और आत्मसम्मान के साथ, बिना कोई ड्रामा, बिना कोर्ट-कचहरी की नौटंकी, बिना सोशल मीडिया पर कीचड़ उछाले, आमिर ने दुनिया को सिखाया कि जुदाई भी एक खूबसूरत प्रक्रिया हो सकती है, अगर दोनों इंसान अपने रिश्ते को मोहब्बत की नजर से देखें, न कि स्वार्थ और ईगो की नजर से।

आज जब हर दूसरा रिश्ता “टॉक्सिक” का टैग पाकर दम तोड़ देता है, जब युवा पीढ़ी रिश्ते निभाने के बजाय “नया ट्रेंड” ढूंढ़ने में लगी रहती है, तब आमिर का यह बयान एक मजबूत संदेश है कि रिश्ते सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि अलग होने के बाद भी एक-दूसरे के लिए आदर और अपनापन बनाए रखने का नाम है।

आमिर ने सिर्फ सिनेमा में नहीं, बल्कि असल ज़िंदगी में भी यह दिखा दिया कि भावनाओं की भी एक गरिमा होती है। जब उन्होंने कहा कि तलाक के बावजूद वह रीना और किरण दोनों से जुड़े हुए हैं, उन्हें परिवार का हिस्सा मानते हैं, तब उन्होंने साबित किया कि प्यार सिर्फ शादी में नहीं, सोच और व्यवहार में होना चाहिए।

आज की दुनिया में जहां ब्रेकअप का मतलब सोशल मीडिया पर स्टोरी अपडेट करना और रिश्ते का अंत पब्लिक तमाशा बनाना है, वहीं आमिर का रिश्ता एक मिसाल है – कि आप अलग हो सकते हैं, लेकिन अपमानित किए बिना, कटुता के बिना, और सबसे जरूरी – बिना नफरत के।

ये बयान उस सोच को भी चुनौती देता है जो मानती है कि तलाक का मतलब हार है, क्योंकि आमिर ने दिखाया कि कभी-कभी अलग होना ही सबसे सम्मानजनक समाधान होता है। उन्होंने ना केवल एक पुरुष के रूप में बल्कि एक संवेदनशील इंसान के रूप में यह बता दिया कि मजबूत वही होता है जो मोहब्बत के बाद भी इज्जत बनाए रखे।

रिश्तों में टूटन अब आम हो चली है, मगर आमिर का यह अंदाज बताता है कि टूटन के बाद भी जुड़ाव जिंदा रह सकता है, बशर्ते इंसान के अंदर इंसानियत बची हो

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