अचानक बाढ़ ने बढ़ाई GLOF की चिंता, सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर

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रसुवा : नेपाल के रसुवा जिले में 26 तारीख की सुबह करीब 9 बजे अचानक आई बाढ़ ने हिमालय में बढ़ते ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF के खतरे को फिर सामने ला दिया। ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानें टूटकर गिरने के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। गांव, सड़कें और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट इसकी चपेट में आ गए तथा सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर है। जुलाई 2025 में भी इसी क्षेत्र के आसपास तिब्बत में ग्लेशियर झील फटने से भोटेकोशी नदी में बाढ़ आई थी, जिसमें 9 लोगों की मौत हुई थी। हिमालय से निकलने वाली कई नदियां भारत से होकर गुजरती हैं, इसलिए इसका खतरा नेपाल तक सीमित नहीं है।

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जुलाई 2026 में हुई IIT खड़गपुर की एक स्टडी के हवाले से दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया कि ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों का तापमान पिछले दो दशकों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघलते हैं और उनका पानी आसपास की झीलों में जमा होकर बर्फ, मलबे या चट्टानों से बनी प्राकृतिक दीवार पर दबाव बढ़ाता है। इस दीवार के टूटने पर पानी चट्टान, मिट्टी, बर्फ और दूसरे मलबे के साथ तेजी से नीचे बहता है, जिसे GLOF कहा जाता है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तापमान बढ़ने की मौजूदा गति के अनुसार अगले करीब 70 वर्षों में हिमालय-काराकोरम क्षेत्र की लगभग 65 फीसदी बर्फ खत्म हो जाएगी। नेचर की एक स्टडी में हिमालय-काराकोरम क्षेत्र की 388 से ज्यादा GLOF घटनाओं के अध्ययन में बर्फ के बड़े हिस्से का अचानक झील में गिरना ग्लेशियल झील फटने की सबसे आम वजह पाया गया। भारी बारिश, भूकंप, पहाड़ों में खुदाई, पेड़ों की कटाई और हाइड्रोपावर गतिविधियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

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GLOF की घटनाओं को पूरी तरह रोकना मुश्किल है, लेकिन संवेदनशील झीलों की पहचान और निगरानी से खतरा कम किया जा सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों, पुराने रिकॉर्ड, जमीनी सर्वे, रडार और सेंसर से जलस्तर तथा प्राकृतिक बांध की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर कृत्रिम चैनल या दूसरी इंजीनियरिंग तकनीकों से पानी नियंत्रित तरीके से निकाला जा सकता है। ISRO की सैटेलाइट स्टडी के मुताबिक, 1984 से 2023 के बीच भारतीय हिमालयी नदी घाटियों की 676 ग्लेशियर झीलों का आकार बढ़ा, जिनमें 130 झीलें भारत में हैं। खतरा विशेष रूप से सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में है। हिमाचल प्रदेश की गेपांग घाट ग्लेशियर झील का क्षेत्रफल 1989 में 36.49 हेक्टेयर से बढ़कर 2022 में 101.30 हेक्टेयर हो गया, जो 178% की वृद्धि है।

 

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