श्रीनाथ विश्वविद्यालय में “सतत विकास लक्ष्यों पर उभरते विचार” विषय पर दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन

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जमशेदपुर : श्रीनाथ विश्वविद्यालय जमशेदपुर में सतत विकास की थीम पर दो दिवसीय अंतराष्ट्रीय सम्मेलन का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय परिसर में दो दिनों तक 6 और 7 फरवरी को आयोजित हुआ जिसमें देश विदेश से छात्र, शोधार्थी और शिक्षाविदों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में कई विषयों को शामिल किया गया था।

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सतत विकास, अंतर्विषयक संवाद और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग पर केंद्रित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना था कि सार्थक और स्थायी परिवर्तन की शुरुआत सूचित एवं सकारात्मक संवाद से होती है।

सम्मेलन में डॉ. भारत कुमार मेहर, सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, वाणिज्य विभाग, दर्शन साह कॉलेज (पूर्णिया विश्वविद्यालय) की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। उन्होंने अकादमिक संवाद और शोध आधारित विचार-विमर्श के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके अलावा डॉ. सुकांत बोस, सहायक प्राध्यापक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग, एकेडमी ऑफ टेक्नोलॉजी, पश्चिम बंगाल ने तकनीकी एवं नवाचार से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।

डॉ. नवोनिल बोस, सुप्रीम नॉलेज फाउंडेशन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में उच्च शिक्षा व शोध पर अपने विचार रखे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉ. जैकब ओटिम, सहायक प्राध्यापक, क्याम्बोगो विश्वविद्यालय ने भी सम्मेलन में भाग लिया और वैश्विक शैक्षणिक सहयोग पर व्यक्तव दिया। संयुक्त राज्य अमेरिका से डॉ. प्रकाश कुमार झा, सहायक प्राध्यापक, प्लांट एवं सॉयल साइंसेज विभाग, मिसिसिपी स्टेट यूनिवर्सिटी ने पर्यावरण संरक्षण और कृषि विज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। थाईलैंड के डॉ. जॉन वॉल्श , एसोसिएट डीन एवं डायरेक्टर, इंग्लिश लैंग्वेज प्रोग्राम्स, इंटरनेशनल कॉलेज, क्रिर्क यूनिवर्सिटी ने भाषा, संप्रेषण और वैश्विक शिक्षा की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

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समापन सत्र में सम्मेलन के निष्कर्षों की समीक्षा की गई साथ ही सम्मेलन में भाग लेने वाले वक्ताओं, प्रतिनिधियों, आयोजन समिति के सदस्यों एवं स्वयंसेवकों को धन्यवाद दिया गया। शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा उत्कृष्ट शोध पत्रों को उनके अकादमिक महत्व एवं प्रासंगिकता के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

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