हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का झारखंड में असर: पारा गिरा, ठंडी हवा से शीतलहर का खतरा


झारखंड: राज्य में अभी-अभी India Meteorological Department (IMD) के अनुसार उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में चल रहे पश्चिमी विक्षोभ और बर्फबारी का असर सीधे मैदानी इलाकों तक पहुँच रहा है। इस प्रक्रिया के चलते सप्ताह की शुरुआत में ही झारखंड के कई हिस्सों में पारा गिरने लगा है और ठंडी हवाओं के असर से शीतलहर की संभावना बन गई है।
हालाँकि दिन में कुछ-बहुत धूप खिल रही है, लेकिन उसी के साथ आसमान खुलने से हिमालय से आती ठंडी हवा मैदानी क्षेत्रों तक पहुँच रही है, जिससे तापमान में तेजी से कमी आई है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में राज्य के न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट की संभावना जताई है। विशेषकर जिलों जैसे पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, गुमला, लोहरदगा व सिमडेगा में शीतलहर या कनकनी की स्थिति बनी रह सकती है।
इसी तरह इतिहास में देखा गया है कि इसी महीने के अंत में अक्सर न्यूनतम तापमान गहराई तक गिरता है — जैसे 2017 में नवंबर में पलामू में सिर्फ 9.0 डिग्री दर्ज हुआ था और 2022 में 7.5 डिग्री तक जा गिरा था। इस साल भी ठंड के पहले संकेत मिल रहे हैं इसलिए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि La Niña जैसी वैश्विक जलवायु प्रवृत्तियों और हिमालयी हवाओं की सक्रियता मिलकर इस तरह की जल्दी ठंड के पीछे-पीछे कारण बन रही है।
इस स्थिति में, लोगों को सलाह दी गई है कि सुबह-शाम खासकर बच्चों, बुजुर्गों व बीमार लोगों को ठंडी हवा से बचाया जाए, घन-कुहासा रहने की संभावना है इसलिए वाहन चलाते समय एवं सुबह-सुबह जागते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें।




