सहारा निवेशकों को राहत: रिफंड पोर्टल से अब तक 8,429 करोड़ रुपये लौटाए, प्रक्रिया 2026 तक जारी


नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ किया है कि सहारा इंडिया समूह के निवेशकों को उनका पैसा लौटाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। सरकार ने बताया कि जो भी पात्र जमाकर्ता निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करेंगे, उन्हें उनकी वैध जमा राशि वापस की जा रही है।

सरकार ने संसद के दोनों सदनों में जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 29 मार्च 2023 के आदेश के अनुपालन में सहारा समूह की चार बहुराज्य सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं के लिए 18 जुलाई 2023 को “सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल” शुरू किया गया था। इसके माध्यम से निवेशक ऑनलाइन और कागजरहित तरीके से रिफंड के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की निगरानी में, न्याय मित्र की सहायता से संचालित की जा रही है। सरकार के अनुसार, पोर्टल पर प्राप्त सभी आवेदनों की पहचान और जमा राशि से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद पारदर्शी तरीके से उन्हें प्रोसेस किया जा रहा है।
जिन जमाकर्ताओं के दावे सत्यापित हो जाते हैं, उन्हें आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे राशि भेजी जा रही है। फिलहाल प्रत्येक पात्र जमाकर्ता को अधिकतम 50,000 रुपये तक की राशि लौटाई जा रही है। यदि किसी आवेदन में कमी पाई जाती है, तो आवेदक को सूचित किया जाता है और री-सबमिशन पोर्टल के जरिए दोबारा आवेदन करने का अवसर दिया जाता है।
सरकार ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सहारा-सेबी रिफंड खाते से अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपये सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक को स्थानांतरित किए गए हैं। साथ ही, निवेशकों को रिफंड देने की समय-सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई है।
20 जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार, सहारा समूह की सहकारी समितियों से जुड़े करीब 39.46 लाख जमाकर्ताओं को 8,429.42 करोड़ रुपये की राशि लौटाई जा चुकी है। पूरे देश से कुल 1.43 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें लगभग 97,412 करोड़ रुपये के दावे शामिल हैं।
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों से सबसे अधिक आवेदन आए हैं। झारखंड में ही लगभग 13.95 लाख निवेशकों ने रिफंड के लिए आवेदन किया है, जिनमें से अब तक 3.73 लाख से अधिक आवेदनों को प्रोसेस कर 847.67 करोड़ रुपये लौटाए जा चुके हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानक प्रक्रिया के तहत पोर्टल पर जिला या लोकसभा क्षेत्रवार विवरण नहीं रखा जाता, लेकिन राज्यों के आधार पर आवेदन, दावे और किए गए भुगतान का पूरा ब्योरा उपलब्ध है। केंद्र सरकार का कहना है कि रिफंड प्रक्रिया को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।



